वनांचल स्वर : नीम और भूलिंग जड़ी से मलेरिया का इलाज...

सीजीनेट जन पत्रकारिता यात्रा आज ग्राम-कह्बडरी, ब्लाक-मानपुर, जिला-राजनांदगांव (छत्तीसगढ़) पहुँची है वहां से गाँव के रामलाल मलेरिया की दवा बता रहे हैं. वे बता रहे हैं कि वे मलेरिया की बीमारी में नीम और भुलिंग की जड़ी का उपयोग करते हैं इसके लिए नीम और भुलिंग की जड़ी दोनों को अलग-अलग आधा गिलास पानी में पकाकर लेते हैं नीम की पत्ती को भी उपयोग करते हैं 4 दिन तक प्रतिदिन खाली पेट लेने से मलेरिया से राहत मिल सकता है, खाते समय कड़वा लगता है इसलिए खाने के बाद शक्कर भी ले सकते हैं इसे सभी उपयोग कर सकते हैं इस जड़ी को किसी भी प्रकार की मलेरिया बुखार में उपयोग कर सकते हैं | बाबूलाल@9713997981.

Posted on: Dec 20, 2017. Tags: BABULAL NETI SONG VANANCHAL SWARA VICTIMS REGISTER

आपका स्वास्थ्य आपके मोबाइल में : उँगलियों के कतरी (घिनी) रोग का उपचार -

सीजीनेट जन पत्रकारिता यात्रा आज ग्राम-गोटुलमुंडा, पोस्ट-तरईगोटिया, ब्लाक-दुर्गकोंदल, जिला-उत्तर बस्तर कांकेर (छत्तीसगढ़) में पहुँची है जहां बाबूलाल नेटी की मुलाक़ात वैद्य घन्सुराम टेकाम जी से हुई है जो उन्हें कतरी की बीमारी के बारे में बता रहे है, कतरी (घिनी) की बीमारी उंगलियों के बीचो बीच होता है इसमें बहुत दर्द होता है, उसके लिए दवाई थुहा है उसको घोलकर लगाना है और उसके खोल को भी उँगलियों में लगा लेना है और उसके दूध को भी लगाना है और उसके खोल को तीन दिन तक लगा कर रखना है उससे वो बीमारी ठीक हो जाएगी | वे बता रहे हैं कि गाँव देहात में यह आम बीमारी है और इस विधि से वे बहुत से रोगियों का उपचार कर चुके हैं इसमें निश्चित ही आराम होता है

Posted on: Dec 19, 2017. Tags: BABULAL NETI SONG VICTIMS REGISTER

पानी भरी गंदी जगहों पर मछली पालिये, मछली गन्दगी को खा जाती है और हम बीमारी से बचते हैं...

सीजीनेट जन पत्रकारिता जागरूकता यात्रा आज ग्राम-हाटकोंदल, तहसील-दुर्गकोंदल जिला-उत्तर बस्तर कांकेर (छत्तीसगढ़) में पहुँची है वहां बाबूलाल नेटी की मुलाक़ात सरोज कुमार मंडावी के साथ हुई है जो एक गड्ढे में मछली पाल रहे हैं वे बाबूलाल को बता रहे हैं कि गड्डे की गंदगी को ख़त्म करने के लिए उन्होंने मछली पाला है जैसे जो भी खाना बचता है उसको लोग गड्डे में डाल देते है जिससे बहुत गंदगी हो जाती है मछली पालने से उस गंदगी को मछलियाँ खा लेती है उसके कारण गड्डे साफ़ रहते है और मलेरिया आदि जैसे बीमारियों से इस तरह से बचा जा सकता है। वे बता रहे हैं कि वे स्वच्छ भारत अभियान के तहत जागरूकता भी लाना चाहते हैं कि इस तरह से मछली पालकर लोग अपने आसपास की पानी भरी जगहों को साफ़ रख सकते हैं |

Posted on: Dec 18, 2017. Tags: BABULAL NETI SONG VICTIMS REGISTER

आदिवासियों की पुरानी परम्परा जत्ता या जाता में बिजली नहीं लगती और शरीर भी स्वस्थ रहता है...

सीजीनेट जन पत्रकारिता यात्रा आज ग्राम-दमकसा, ब्लाक-दुर्गकोंदल, जिला-कांकेर (छत्तीसगढ़) में पहुँची है वहां से बाबूलाल नेटी के साथ में गजानंद लान्जिवार है जो गाँव में पाए जाने वाले जाता या जत्ता के बारे में जानकारी दे रहे है. जत्ता दो गोल पत्थर से बनाया जाता है जिसको हिंदी में (पत्थर की चक्की) कहते है उसमे एक मुठिया लगा रहता है जिसको हाथ से पकड़कर घुमाया जाता है इससे गेहूं, दाल, भुट्टा और सूजी जैसे और भी अनाज को पीस सकते है ये आदिवासियों की पुरानी परम्परा है और ये आज भी ग्रामीण क्षेत्रो में देखने को मिलता है | धान के लिए अलग तरह का जाता होता है इस तरह के चक्की में बिजली नहीं लगती सिर्फ मेंहनत लगती है जिससे शरीर भी स्वस्थ रहता है

Posted on: Dec 17, 2017. Tags: BABULAL NETI

सीखकर अपनी दुकान खुद बना रहा हूँ, बड़े घर भी बना सकता हूँ, ऐसा और युवा भी कर सकते हैं...

सीजीनेट जन पत्रकारिता जागरूकता यात्रा आज ग्राम-अमोड़ी, विकासखंड-अंतागढ़, जिला-कांकेर (छत्तीसगढ़) में पहुँची है वहां बाबूलाल नेटी गाँव के युवा दुर्गाप्रसाद सलाम से बात कर रहे हैं जो बता रहे हैं कि उन्होंने अलग-अलग जगहों में काम कर कारीगरी सीखी और बिना किसी कारीगर की मदद से अपना दुकान बना रहे हैं. वे कह रहे हैं कि बगैर किसी बाहरी मदद के वे ऐसे ही और बड़े घर भी बना सकते हैं आगे अगर ज़रुरत पड़े. गांव में 300 की जनसंख्या है दुकान के लिए दुर्गुकोंदल से सामान लाते है स्वयं अपनी पूंजी लगाकर रोजगार कर आज के युवाओ को आत्मनिर्भर होने का संदेश दे रहे हैं इस प्रकार से हम देश की बढ़ती बरोजगारी को कम कर सकते हैं | बाबूलाल नेटी@9713997981

Posted on: Dec 15, 2017. Tags: BABULAL NETI SONG VICTIMS REGISTER

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