मईया हे गंगा मईया, मांगिला हम वरदान हे गंगा मैया, मांगिला हम वरदान...छटपूजा गीत
कंचन नगर, जिला-मुजफ्फरपुर (बिहार) से सुनील कुमार एक छटपूजा गीत सुना रहे हैं :
मईया हे गंगा मईया-
मांगिला हम वरदान हे गंगा मैया, मांगिला हम वरदान-
जनकपुर नईहर दीह, सासुर अवधपुर समान-
राजा दशरथ ससुर दीह, सासु कौशल्या समान-
पार्वती हमरा बनइह, स्वामी शंकर समान-
राम जईसन बेटा तू दिहा, बेटी सीता सामान-
मइया हे गंगा मइया...
Posted on: Mar 22, 2018. Tags: SONG SUNIL KUMAR VICTIMS REGISTER
बांसुरी में बीन की धुन...
मुड़गीचक, ग्राम-सुमेरा, मुजफ्फरपुर (बिहार) से सुनील कुमार अपने मित्र मो. मुर्तुजा के सांथ हैं वे बांसुरी बनाते है इतना ही नहीं बांसुरी बजाने की भी कला रखते और आज वे सीजीनेट के सभी सुनने वाले संथियों को बांसुरी से बीन की मधुर ध्वनि सुना रहे हैं...
Posted on: Mar 21, 2018. Tags: SONG SUNIL KUMAR VICTIMS REGISTER
लोकगीत का अपना शास्त्र रहा है, लोकसंगीत में अनगढ़ता और खुरदुरापन ही उसका सौंदर्य होता है...
होली को चैती की तरह नहीं गाते, चैती को सोहर की तरह नहीं गाते, सोहर निर्गुण की तरह नहीं गाया जाता, गोड़उ का राग अलग होता है, धोबिया गीत अलग, खिलौना अलग होता है| जोग सहाना का राग अलग, विवाह के गीत में हर विध में धुन-राग बदल जाती है गांव की गीतहारीन महिलाएं का छठ का गीत बिल्कुल अलग राग-धुन रखता है, पराती और पचरा का राग बदल जाता है, सदियों और पीढ़ियों से लोक का अपना शास्त्र रहा है, अलिखित होने के बावजूद यह तेजी से बड़े दायरे में फैलता रहा है और एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी के मानस में रचता-बसता भी रहा है, यह अनगढ़ रहा है इसलिए लोकसंगीत में अनगढ़ता हो, खुरदुरापन हो तो उसे बहुत परफेक्ट करने की जरूरत नहीं, लोकसंगीत में अनगढ़ता और खुरदुरापन उसका सौंदर्य होता है|
Posted on: Mar 17, 2018. Tags: SONG SUNIL KUMAR VICTIMS REGISTER
चुवत अन्हरवे अँजोर हो रामा चइत महिनवा...चइता गीत
मालीघाट मुजफ्फरपुर (बिहार) से सुनील कुमार एक चइता गीत सुना रहे हैं :
चुवत अन्हरवे अँजोर हो रामा चइत महिनवा-
अमवा मउरि गइलें नेहिया बउरि गइलें-
देहियाँ टूटेला पोरे पोर हो रामा चइत महिनवा-
उड़ि उड़ि मनवा छुवेला आसमनवा
बन्हल पिरितिया के डोर हो रामा चइत महिनवा-
अँखिया न खर खाले निंदिया उचटि जाले
बगिया भइल लरकोर हो रामा चइत महिनवा...
Posted on: Mar 16, 2018. Tags: SONG SUNIL KUMAR VICTIMS REGISTER
काच की बांस की बहंगिया, बहंगी लचकत जाय...लोकगीत
सरैया बाजार, मुज़फ्फरपुर (बिहार) से सुनील कुमार एक पारंपारिक लोकगीत सुना रहे हैं :
काच की बांस की बहंगिया, बहंगी लचकत जाय-
हो काना सुरुज देव सहैया बहंगी घाट पहूंचाय-
बाटा जे पूछे ला बटुहिया, पीपल बई के करत जाय-
अनारी होइहे रे बटुहिया पीपल अदित देव के जाय-
पीना न बाजु बाबू पियरिया बेलैय अरगिया के बेर-
चलाया न सुमन बाबू संगवा बेलैया अरगिया के बेर...





