किसान स्वर : हम लोग अब गाय बैल घर में नहीं रखते तो खेती के लिए गोबर खाद भी नहीं मिलता...
ग्राम पंचायत-हान्केर, तहसील-पखांजुर, विकासखंड-कोयलीबेडा, जिला-उत्तर बस्तर कांकेर, (छत्तीसगढ़) से सुरेश बता रहे हैं कि उनके गाँव क्षेत्र में अधिकतर धान और मक्का का खेती किया जाता है, उसकी तैयारी वे जमीन की अच्छी तरह से जुताई करने के बाद, बीज की बोवाई करते हैं जिसमे वे मुख्य रूप से रासायनिक खाद का उपयोग करते हैं, पहले लोग गाय, बैल घर में रखा करते थे जिससे उन्हें गोबर (खाद) मिल जाता था, लेकिन अभी वर्तमान में गाय को घर में ज्यादातर नही रखा जा रहा है इसलिए वे रासायनिक खादों का उपयोग करते हैं, जिससे जमीन की उर्वरक शक्ति कम होती जा रही है, पहले लोग गोबर खाद का उपयोग करते थे उसमे तीन साल तक कोई खाद डालने की जरुरत नही होती थी, इसलिए अधिक मात्रा में गोबर खाद का उपयोग करना चाहिए जिससे फसल में अधिक उत्पादन के साथ-साथ जमीन की उर्वरक शक्ति भी नष्ट न हो...
Posted on: Sep 18, 2018. Tags: AMAR MARAVI CG KANKER KISAN KOELIBEDA SONG SWARA VICTIMS REGISTER
सूरा भेड़ी यो याया सूरा भेड़ी भेड़ी यो याया...गोंडी विवाह गीत
ग्राम-मुरावंडी, तहसील-पखांजूर, जिला-उत्तर बस्तर कांकेर (छतीसगढ़ )से विष्णु राम दुग्गा के साथ बुधयारिन बाई एक गोंडी गीत सुना रही है, इस गीत को दुल्हन को सजाते समय गाया जाता है:
सूरा भेड़ी यो याया सूरा भेड़ी भेड़ी यो याया-
नना भेड़ी पोयकन वो याया-
नना भेड़ी पोयकन रोय याया-
बोना सुदा पोयकिन रोय नूनी-
मामा न मर री मन तोर यो याया-
ओना सुदा परवी रोय नूनी-
जोड़ लोता इन्दानुर रोय नूनी...
Posted on: Sep 18, 2018. Tags: CG GONDI KANKER MARRIAGE PAKHANJUR SONG VISHNU DUGGA
नालुग कोटोंग भूमिणों नुनाले-नालुग कोटोंग भूमिणो...गोंडी छट्टी गीत
ग्राम-टेकामेट्टा, तहसील-पखांजूर, जिला-उत्तर बस्तर कांकेर (छत्तीसगढ़) से सन्नी उसेंडी के साथ दुलोशा, डबसा और लहरों एक गोंडी छट्टी गीत सुना रहे हैं, इस गीत को जब बच्चे का जन्म होता है तब गाया जाता है:
री री लोयो री री लोयो री री ला री री लोयो री री ला-
नालुग कोटोंग भूमिणों नुनाले-नालुग कोटोंग भूमिणों-
चारो समधी बिसार हो नुनाले-चारो समधी बिसार हो...
Posted on: Sep 18, 2018. Tags: CG CHILDREN GONDI KANKER PAKHANJUR SONG SUNNY USENDI
हमारे यहाँ गोंडी बोलने वाले शिक्षक आ जाये तो शिक्षा का स्तर सुधर सकता है, अभी बच्चे नहीं समझते...
ग्राम पंचायत-हान्केर, तहसील-पखांजुर, विकासखंड-कोयलीबेडा, जिला-उत्तर बस्तर कांकेर (छत्तीसगढ़) से बलराम कुलदीप, लवकुमार और सुरेश आचला सीजीनेट जन पत्रकारिता यात्रा के अमर मरावी को बता रहे हैं कि उनके गाँव क्षेत्र में अधिकतर लोग, बच्चे से बूढ़े सभी गोंडी अधिक बोलने वाले हैं, इनके गाँव के स्कूल प्राथमिक या माध्यमिक में ज्यादातर शिक्षक हिंदी, छत्तीसगढ़ी बोलने वाले हैं, वहां के स्कूल में गोंडी बोलने वाले शिक्षक नही है जिससे बच्चों के साथ बातचीत का आदान-प्रदान पूर्ण रूप से नही हो पाता है, इससे पढाई में भी परेशानियां होती है अगर कोई गोंडी बोलने वाले शिक्षक आ जाए तो प्राथमिक विद्यालय में अध्धयन के स्तर में काफी मात्रा में सुधर हो सकता है |
Posted on: Sep 17, 2018. Tags: AMAR MARAVI CG EDUCATION GONDI KANKER KOELIBEDA SONG VICTIMS REGISTER
ओरा बोरा मरमा येलो ले ओरा बोरा मरमा रोय...गोंडी विवाह गीत
आश्रित ग्राम-मुरावंडी, तहसील-पखांजूर, जिला-उत्तर बस्तर कांकेर (छतीसगढ़) से राधा कचलाम के साथ सुजान बाई, रजोला बाई और समरी एक गोंडी विवाह गीत सुना रहे है:
रे रे लोयो रेला रे रे ला रे रे ला रे रेला-
से से रूम जूम रेला रे रे ला-
ओरा बोरा मरमा येलो ले-
ओरा बोरा मरमा रोय-
से से रूम जूम रेला रे रे ला-
जाति मंडाव पेकोर येलो ले-
जाति मंडाव पेकोर रोय-
ओरा इसे मरमा येलो ले-
ओरा इसे मरमा रोय-
से से रूम जूम-
नेडे मरमा आयार येलो ले-
नेडे मरमा आयार रोय-
से से रूम जूम-
रे रे लोयो रेला रे रे ला-
रेला रे रे ला...

