एक दिन ऐसन आई गा भाई, ये दुनिया छुट जाहिगा... छत्तीसगढ़ी गीत
राजेन्द्र गुप्ता आदिवासी बहुल क्षेत्र ब्लाक-तमनार, जिला-रायगढ़ (छत्तीसगढ़) से
गीत सुना रहे हैं:-
एक दिन ऐसन आई गा भाई-
ये दुनिया छुट जाहिगा-
पिंजरा के सुहाना,मोर बोलत मैना-
उड़ जाहिना ,उड़ जाहिना-
नींद री आवे बाबु तेहर-
नींद मन करबे ना-
पिंजरा के सुहाना मोर बोलत मैना-
उड़ जाहिना ,उड़ जाहिना-
एक दिन ऐसन आईगा भाई...
Posted on: Aug 20, 2016. Tags: RAJENDRA GUPTA SONG VICTIMS REGISTER
लहर-लहर-लहर लहराये रे भारत का झंडा प्यारा...राष्ट्रीय गीत
जिला-बेमेतरा (छत्तीसगढ़) से संजय चन्द्र एक राष्ट्रीय गीत सुना रहे हैं:
लहर-लहर-लहर लहराये रे भारत का झंडा प्यारा-
हैं तिरंगा रंगा हैं तिरंगा रंगा-
केसरिया शक्ति का परिचय देता हैं, देता हैं-
श्वेत रंग सच्चाई को समेठा हैं, समेटा हैं-
हरियाली का रंगा हैं हरा-हरा रंगा हैं...
Posted on: Aug 15, 2016. Tags: SANJAY CHANDRA SONG VICTIMS REGISTER
Bultoo Radio from Chhattisgarh in Chhattisgarhi language: 15th August 2016...
Today Rajendra Koreti is helping us listen to songs and reports from all over Chhattisgarh in this latest edition of Bluetooth radio program in Chhattisgarhi language. Villagers use their mobile phones to record these songs and reports. They call 08050068000 to record. Now this program can be downloaded by people from their Gram Panchayat office if it has Broadband or from a download centre nearby. They can also get it from someone with smartphone and internet and then via bluetooth.
Posted on: Aug 15, 2016. Tags: CHHATTISGARH RAJENDRA KORETI SONG VICTIMS REGISTER
हिन्दू मांगे आजादी ,मुस्लिम मांगे आजादी... आजादी दिवस गीत
वीरेन्द्र गन्धर्व जिला-राजनंदगांव (छत्तीसगढ़) से आजादी दिवस पर गीत सुना रहें हैं:
हिन्दू मांगे आजादी, मुस्लिम मांगे आजादी-
सिख मांगे आजादी ईसाई माँगे आजादी-
आजादी आजादी...
सबने माँगी आजादी तभी मिली आजादी-
बचपन की थी कुर्बानी-
संघर्षो से डरे नहीं दे दी अपनी जिन्दगानी-
लो सम्हालों आजादी देखो भालो आजादी-
सबके मन में जीवन में मिलकर डालो आजादी...
Posted on: Aug 13, 2016. Tags: SONG VICTIMS REGISTER VIRENDRA GANDHARV
जहाँ जंगल है, वहाँ मंगल है, मीठे कंद-मूल मीठे फल हैं...कविता
जिला-राजनांदगांव (छतीसगढ़) से वीरेन्द्र गन्धर्व जंगल पर एक कविता सुना रहें हैं:
जहाँ जंगल हैं, वहाँ मंगल है-
मीठे कंदमूल मीठे फल हैं-
बहता हैं पावन अनीर – बहता हैं शीतल सलिल-
स्वस्थ रहते हैं निवासी-
प्रसन्न रहते हैं वनवासी-
गृह पट्टे का आधार मिले-
वन पर पूरा अधिकार मिले – यहीं दुआएं प्रतिपल हैं-
जहाँ जंगल है, वहाँ मंगल है-
