सहकार रेडियो : (कहानियों का कारवां) नशा
साथियो आप सुन रहे हैं सीजीनेट स्वर पर सहकार रेडियो का कार्यक्रम “कहानियों का कारवां” में आज आप सुनेंगे मुंशी प्रेमचंद की कहानी “नशा”। इसे स्वर दिया है रंगकर्मी साथी विनोद कुमार ने। इस कार्यक्रम को https://www.sahkarradio.com/ से लिया गया है|
Posted on: Dec 20, 2020. Tags: STORY
वर्तमान इन्सान कुत्ते को गुमाना याद रहा गाय की रोटी भूल गए...कहानी-
सुरेश कुमार बड़वानी मध्यप्रदेश से कहानी सुना रहें है:
वर्तमान इन्सान कुत्ते को गुमाना याद रहा गाय की रोटी भूल गए-
ब्यूटी पार्लर याद रहा अब लम्बी चोटी बुल गए-
रिमोंट कंट्रोल याद रहा बिजली का कटका भूल गए-
सीस का पानी याद रहा पानी का मटका भूल गए-
बोतल और पावस याद रहा प्याहू का पानी भूल गए-
टीवी सीरयल याद रहा शादी की कहानी भूल गए-
हेल्लो हाय याद रहा पर नम्र प्रणाम भूल गए-
हिल स्टेशन याद रहा चारो दाम भूल गए-
अंकल एंटी याद रहा काका काकी भूल गए... ID(183138)GM
Posted on: Dec 20, 2020. Tags: SONG STORY VICTIMS REGISTER
संगीत का ट्रेनिंग देना चाहते हैं...
जिला-कोरबा(छत्तीसगढ़)से संजीव कुमार केवट सन्देश दे रहे है:
जिन भाई बहनों को गाना सिखना हो या सिखने की इच्छा हो तो फोन नम्बर 9479121529 या 9479121529 पर संपर्क कर सकते है| ID(182930)RM
Posted on: Dec 19, 2020. Tags: SONG STORY VICTIMS REGISTER
सहकार रेडियो : किसान और चीता (बाल कहानी)
बच्चों, सीजीनेट पर सहकार रेडियो का कार्यक्रम बाल चौपाल में आज आप सुनेंगे वियतनाम की लोक कथा “किसान और चीता”| जिसे स्वर दिया है जयपुर राजस्थान से सुनीता जी ने| कहानी ली है नेशनल बुक ट्रस्ट की पुस्तक “सुनो कहानी” से| ध्वनि सम्पादन किया है शिल्पी ने|
इस कार्यक्रम को https://www.sahkarradio.com से लिया गया है|
Posted on: Dec 19, 2020. Tags: SONG STORY VICTIMS REGISTER
गाँव की कहानी...
ग्राम-मुतनपाल, ब्लाक-बास्तानार, जिला-बस्तर (छत्तीसगढ़) से गोपी राम पोयाम गाँव की कहानी बता रहे है, गाँव में पहले मुचाकी समुदाय के लोग आये है, बाद में पोयाम समुदाय के लोग आये, जब गाँव में तीन-चार घर थे तब से गाँव में रहा रहे है न उस समय सड़क न गाड़ी-घोड़ा कुछ भी नही थी, उस समय पैदल ही कहीं आना जाना जैसे गीदम,बास्तानार,जगदलपुर पैदल जाना पड़ता था, उस समय कृषि के सम्बन्ध में ज्यादा जानकारी नहीं थी, तो वे ज्यादातर जंगल से ही पत्ती,फल-फुल,कंदमूल आदि खाकर जीवन यापन करते थे,और उस ज़माने में आम तोड़ने,खाने जंगल जाने पर आदमी चोरो और के होने का डर का दहशत फैला रहता था और आज के ज़माने में नक्सलियो का दहशत बना हुआ है|सम्पर्क नम्बर @9406344921, ID(176356)RM
