बेटी हूँ मैं बेटी तारा बनूँगी, तारा बनूँगी मैं सहारा बनूँगी...बेटियों पर गीत
ग्राम-पनेड़ा, विकासखंड-गीदम, जिला-दंतेवाडा (छत्तीसगढ़) से राजकुमारी कोडयाम बेटियों पर एक गीत सुना रही है:
बेटी हूँ मैं बेटी तारा बनूँगी, तारा बनूँगी मैं सहारा बनूँगी-
गगन पे चमके चंदा मैं जब तक चमकुंगी-
जब तक चमकुंगी मैं उजियाला लाऊंगी-
पढूंगी लिखूंगी मैं मेहनत भी करुँगी-
अपने पाँव से चलकर मैं दुनिया को देखूंगी-
दुनिया को देखूंगी मैं दुनिया को समझूंगी-
बेटी हूँ मैं बेटी तारा बनूँगी, तारा बनूँगी मैं सहारा बनूँगी...
Posted on: Oct 25, 2017. Tags: RAJKUMARI KODIYAM DANTEWADA SONG VICTIMS REGISTER
पढ़ती हूँ तुम्हारे बल से जरा ध्यान करो माँ : सरस्वती वंदना...
किलकारी बाल केंद्र मुजफ्फरपुर बिहार से कीर्ति कुमारी एक सरस्वती वंदना सुना रही है:-
पढ़ती हूँ तुम्हारे बल से जरा ध्यान करो माँ-
हम लोग है नादान विद्या दान करो माँ-
हे माँ सरस्वती हे माँ सरस्वती-
जब आये परीक्षा मेरी मेरा भय मिटा देना-
सुन लो प्रार्थना मेरी कही बदनाम ना होना-
हे माँ सरस्वती हे माँ सरस्वती-
पढ़ती हु तुम्हारे बल से जरा ध्यान करो माँ-
हम लोग है नादान विद्या दान करो माँ-
हे माँ सरस्वती हे माँ सरस्वती...
Posted on: Sep 30, 2017. Tags: KIRTI KUMARI SONG VICTIMS REGISTER
लाला कौन महिनवा मा होवै दियर जुड़े पौबये नई हो...बघेलखंडी सोहर गीत
ग्राम-चिन्हर, पोस्ट-कोटा, थाना-पनवार, जिला-रीवा (मध्यप्रदेश) से मानसी कुमारी बघेलखंडी भाषा में एक सोहर गीत सुना रही हैं ये गीत विशेष कर बच्चे के नामकारण या जन्मोत्सव के शुभ अवसर पर गाया जाता है :
लाला कौन महिनवा मा होवै दियर जुड़े पौबये नई हो-
माया लगते असढवा मा हो...
Posted on: Sep 14, 2017. Tags: MANSI KUMARI SONG VICTIMS REGISTER
टीचर जी टीचर जी, एक बार मुस्कुराइए...शिक्षा गीत -
ग्राम-करकेटा, पोस्ट-जोगा, थाना-उटारी रोड, जिला-पलामू (झारखण्ड) से अंजनी कुमारी एक गीत सुना रही है :
टीचर जी टीचर जी, एक बार मुस्कुराइए-
मेरा प्रेम सदा दिल में रखिए-
क, ख , ग, घ, लिखना सिखाए-
क, ख , ग, घ पढना सिखाए-
मेरा प्रेम सदा दिल में रखिए-
1, 2, 3, 4 लिखना सिखाए-
1, 2, 3, 4 पढ़ना सिखाए-
टीचर जी टीचर जी, एक बार मुस्कुराइए...
Posted on: Aug 14, 2017. Tags: ANJANI KUMARI SONG VICTIMS REGISTER
बड़ी कठिन बाट आसान, की कही महंगाई हो...बघेली कविता -
जिला-सीधी (मध्यप्रदेश) से फूल कुमारी तिवारी एक बघेली कविता सुना रही है :
बड़ी कठिन बाट आसान, की कही महंगाई हो-
बाबू हमका गाँव ले चला-
घर चलेब त अन्न उगाऊ, करबे खूब किसानी हो-
बाबू हमका गाँव ले चला-
उठ दीन सारे उपरी पाथव, तय दूई ठो रोटी हो-
बाबू हमका गाँव ले चला-
बड़ी कठिन बाट आसान, की कही महंगाई हो...
