नीम की टहनियों पर मचल उठा बोर...कविता
ग्राम-छतरपुर, विकासखण्ड-घुघरी, जिला-मंडला,(मध्यप्रदेश) से
मोहन मरावी गीत सुना रहे है :
नीम की टहनियों पर मचल उठा बोर-
आया है ऊमस भरा गर्मी का दौर-
सूरज अब जल्दी ही जाता है-
जाग दिन भर बरसता है धरती पर आग-
हवा नहीं रख पती है गर्मी पर-
गोर लुवो के झोके से झुलस रहा दात-
गर्मी ने दे डाली कपड़ो को मात-
चली गई एसे में ठंडक की ठोर-
आता यदि बादल का टुकड़ा जिस ओर-
फैलाते उसके ही आगे हम हाथ-
थोड़ी सी छाव तभी होती सर मोर-
दिन भर के बाद कही आती जब शाम-
तब जा के मिल पाता मन को आराम-
मगर रात में होती अकुलाहट और...
Posted on: Apr 01, 2017. Tags: MOHAN MARAVI SONG VICTIMS REGISTER
सूरज अब जल्दी ही जाता है जाग, दिनभर बरसता है धरती पर आग...कविता
ग्राम-छतरपुर, पोस्ट-गजराज, विकासखण्ड-घुगरी, जिला-मंडला (मध्यप्रदेश) से मोहन मरावी एक कविता सुना रहे है:-
नीम की टहनियों पर, मचल उठा बोर-
आया है उमस भरा गर्मी का दौर-
सूरज अब जल्दी ही जाता है जाग-
दिनभर बरसता है धरती पर आग-
हवा नही रख पाती गर्मी का दौर-
आया है उमस भरा गर्मी का दौर...
Posted on: Mar 30, 2017. Tags: MOHAN MARAVI SONG VICTIMS REGISTER
दाई हो दाई हो नहीं करूँ बिहाव उम्र नहीं है पच्चीस की...देहाती गीत
ग्राम-छतरपुर, पोस्ट-गजराज, विकासखंड-घुघरी, जिला-मंडला (मध्यप्रदेश) से मोहन मरावी एक गीत सुना रहे है:
दाई हो दाई हो नहीं करूँ बिहाव उम्र नहीं है पच्चीस की-
पढ़ेला जाऊं दे देना बासी मिर्चा चटनी ला पिस के-
होई बिहाव मोरो होई जो लईका होई जो आये...
Posted on: Feb 02, 2017. Tags: MOHAN MARAVI SONG VICTIMS REGISTER
मनवा राम सुमर लो भाई रे...भजन गीत
जिला-बैतूल (मध्यप्रदेश) से लालू प्रसाद यादव एक भजन गीत सुना रहे है:
मनवा राम सुमर लो भाई रे-
आज भाई वर रोकेगा रे जन दवार-
रुके सधूगे बन तू सदा सुहानी-
जल झिरिया को है पानी रे-
खोजत-खोजत खोज लिया है-
आज भाई कहिरा कय कनीरा-
मनवा राम सुमर लो भाई रे...
Posted on: Jan 15, 2017. Tags: MOHAN YADAV SONG VICTIMS REGISTER
ढूढ़ रहे है सारे बच्चें, कहा खो गया प्यारा बचपन...बाल शिक्षा पर कविता
ग्राम छत्रपुर, विकासखंड घुघरी, जिला मंडला (मध्यप्रदेश) से मोहन मरावी उन ग्रामीण बच्चों जो बचपन से ही स्कूल नही जाते है उन पर एक कविता सुना रहे हैं:
ढूढ़ रहे है सारे बच्चें, कहा खो गया प्यारा बचपन-
काम-कमाई के चक्कर में, दफन हो गया प्यारा बचपन-
ट्रेन में ढूढ़ता कबाढ़ है, होटल में है बर्तन धोता-
जूतों पर पलिस करता, सडको पर बोझ ढ़ोता-
जंगल-जंगल ढोर चराता, फिरता मारा-मारा बचपन-
ढूढ़ रहे है सारे बच्चें, कहा खो गया प्यारा बचपन-
खेती-खलियाने में, खट खटता जाता है सारा बचपन-
पुरखों से मृध लिया उसी को काट रहा बेचारा बचपन-
ढूढ़ रहे है सारे बच्चें, कहा खो गया प्यारा बचपन-
काम-कमाई के चक्कर में, दफन हो गया प्यारा बचपन-
काम सीखना, ढोर चराना, भात बनाना, बुरा नही है-
ख़ुशी-ख़ुशी सरल कामो, हाथ बाटना बुरा नही है-
लेकिन शिक्षा से दूर हटाना बहुत बुरा है-
श्रम लेकर सरल बनाना, उन्हें फ़साना बुरा है-
पढ़ते-पढ़ते काम सीखते, तो हो जाता न्यारा बचपन-
ढूढ़ रहे है सारे बच्चें, कहा खो गया प्यारा बचपन-
काम-कमाई के चक्कर में, दफन हो गया प्यारा बचपन-
आवाज इसमें अभी अंजाम मत चाहो-
इन्हें पढ़ाओ आज इनसे काम मत चाहो-
फलने दो फूलने दो खुशियों के बेल को-
मासूम है अभी इनका अभी से दाम मत चाहो...
