चलू गा अझलुवा कन्हैया धरे आचार, आचार दुसर लागल लारे झालर मचिया...गीत
जिला-सूरजपुर (छत्तीसगढ़) से हरमन कुमारी एक गीत सुना रही हैं :
चलू गा अझलुवा कन्हैया धरे आचार-
आचार दुसर लागल लारे झालर मचिया-
ओ राधा रानी काहे बताना मोर कती आना-
छोटा के कमाल मै रखे हो परान जोड़ी रे-
ओ राधा रानी काहे बताना मोर कती आना-
छोटा के कमाल मै रखे हो परान जोड़ी रे...
Posted on: Jul 16, 2018. Tags: CULTURE HARAMAN KUMARI SONG VICTIMS REGISTER
मेरा राशन कार्ड डेढ़ साल पहले बना है लेकिन पंचायत से दिया नहीं जा रहा (गोंडी भाषा में)
ग्राम-लामकन्हार, पंचायत-बड़ेतोपाल, तहसील-अंतागढ़, जिला-कांकेर (छत्तीसगढ़) से सुखबती नेताम गोंडी में बता रही है कि उनका राशनकार्ड डेढ़ साल पहले बना है लेकिन उनको पंचायत से राशन कार्ड नहीं दिया जा रहा है| उसके कारण उसको राशन नहीं दिया जा रहा है | उनके परिवार में 3 लोग है और वे लोग मजदूरी करके जीवन बसर कर रहे है उसके लिए उन्होंने जनपद पंचायत में तीन बार शिकायत कर चुकी है लेकिन कोई ध्यान है दे रहे है| कृपया अधिकारियों को फोन कर उनका राशन कार्ड दिलवाने में मदद करें: जिला C.E.O.@9953924884. अधिक जानकारी के लिए संपर्क@9589483615.
Posted on: Jul 16, 2018. Tags: FOOD GONDI SUKHBATI NETAM
हो होरे जिया हो रे का, काया बिता रे बीतरे जियान...शादी गीत-
ग्राम-तिगावल, प्रखण्ड-चैनपुर, जिला-गुमला (झारखण्ड) से पासो देवी और सुमती देवी एक विवाह गीत सुना रहे हैं :
हो होरे जिया हो रे का-
काया बिता रे बीतरे जियान-
होले बिता रे बीतरे काया नोली-
यों हो रे जीजिया, हो होरे का-
आया बिता आय बीता रे जिया-
हाले बिता हरे बितारे काया हनो हंदी-
निपार तायो नाले नना आंजे दुनिया...
Posted on: Jul 16, 2018. Tags: PASO DEVI SONG SUMATI DEVI VICTIMS REGISTER
Today's news from newspapers in Gondi : 17th July 2018...
आदिवासी समाज ने श्रमदान से शुरू किया सामुदायिक भवन का निर्माण-
बुटबेरिया आदिवासी टोला की सड़क पर बना गड्ढा-
एकलव्य आदिवासी भील सेवा समिति की हुई बैठक-
मशरूम लेने जंगल गईं आदिवासी महिलाएं, ज़मानत करानी पड़ी-
Posted on: Jul 16, 2018. Tags: GONDI GONDI NEWS NEWS PROBLEM SANOTI KAWADE
एक पल की जिंदगानी, एक रोज सबको जाना...गीत-
ग्राम-बरेतीकला, ब्लाक, तहसील-जवा, जिला-रीवा (मध्यप्रदेश) से दयासागर कुसवाहा एक गीत सुना रहे हैं :
एक पल की जिन्दगानी एक रोज सबको जाना-
वर्षो की तू क्यों सोचे पल नही ठिकाना-
मल-मल के तूने अपने तन को जो है निखारा-
इत्रों कि खुशबुओं से महके शरीर सारा-
तन-मन से तूने अपने तन को है जो निखारा-
काया जो सांथ होगी ये बात न भुलाना, वर्षो की तू क्यों सोचे पल नही ठिकाना...
