पिंजरे के पंछी रे तेरा दर्द न जाने कोई...भजन गीत -
तमनार, जिला-रायगढ़ (छत्तीसगढ़) से राजेंद्र गुप्ता एक भजन गीत सुना रहे है:
पिंजरे के पंछी रे तेरा दर्द न जाने कोई-
कह न सकूँ मैं अपनी कहानी-
तेरी भी पंछी क्या जिंदगानी रे-
निधि ने तेरी कथा लिखी है-
तेरा दर्द न जाने कोई...
Posted on: Dec 22, 2017. Tags: RAJENDRA GUPTA SONG VICTIMS REGISTER
वनांचल स्वर: बंजर भूमि में भी कम लागत में, कम मेहनत से लाख से अच्छी कमाई की जा सकती है...
ग्राम-चौड़ी, ब्लाक-चारामा, जिला-कांकेर (छत्तीसगढ़) से कुंदन कुमार साहू बता रहे है कि बंजर भूमि में भी लाख की खेती से कम लागत में अच्छी आय कर सकते हैं वे दिखा रहे हैं कि यह सेमियालता का पौधा है और उसमे लाख कीट का संचालन किया जाता है और इसमें उत्पादन अच्छा होता है और आजीविका के लिए अच्छा साधन है सेमियालता बंजर भूमि में भी उगता है और एक साल बाद उसमे कीट का संचालन कर सकते है और साल में दो बार काम मेहनत में फसल ले सकते हैं यह खेती कम समय कम लागत में कर सकते है ये पौधा नाइट्रोजन गैस भी छोडती है इससे मिटटी की उपज अधिक बढ़ जाती है इसमें कीट कोमल डाली में लगती है लाख की दो वेराइटी होती है कुष्मी और रंगीनी।
Posted on: Dec 20, 2017. Tags: MAHENDRA UIKEY SONG VANANCHAL SWARA VICTIMS REGISTER
पारंपरिक गोंडी लोक नृत्य रेला पाटा के बारे में बातचीत...
सीजीनेट जन पत्रकारिता यात्रा आज ग्राम-उमरपाल तीजू,पोस्ट-सिवनी उत्तर बस्तर छत्तीसगढ़ में वीर नारायण शहादत दिवस के उपलक्ष्य में मनाए जा रहे गोंडी संस्कृति महोत्सव में शामिल हुए रेला पाटा दल के अध्यक्ष बैजनाथ जी से बात कर रहे हैं जो बता रहे हैं वे एक साल से रेला पाटा अर्थात रेला संगीत लोकनृत्य समूह चला रहे हैं इनके समूह में 30 लोग हैं जिसमे 16 महिलाएं हैं. पुरुष, महिला, बच्चे सभी इस दाल में इसमें शामिल हैं वाद्य यंत्र में तम्बूरा, मंजीरा, डफली, मांदर आदि का प्रयोग किया जाता है. वाद्ययंत्रों को वे खुद नही बनाते कारीगर से बनवाते हैं वहां पर उनके गाँव के बाहर उनका पहला कार्यक्रम है शादी में भी वे अपना कार्यक्रम करते हैं रेला पाटा गोंडी परंपरा से जुड़ा एक लोक नृत्य है जिसमे लोग समूह में नाचते हैं|
Posted on: Dec 19, 2017. Tags: MAHENDRA SINGH UIKEY SONG VICTIMS REGISTER
मैली चादर ओढ़ के कैसे...भजन गीत -
तमनार, जिला-रायगढ़ (छत्तीसगढ़) से राजेंद्र गुप्ता बता रहे है कि अभी पर्यावरण प्रदूषण के माहौल में पर्यावरण संरक्षक मंडल इस मामले में गंभीर नहीं है और सिर्फ खानापूर्ति करने में अपना योगदान देने में भिड़ा हुआ है उसी से सम्बंधित एक गीत सुना रहे है:
मैली चादर ओढ़ के कैसे-
द्वार तिहारे आऊ-
हे पवन परमेश्वर मेरे-
मन ही मन शरमाऊ-
मैली चादर ओढ़ के कैसे...
Posted on: Dec 16, 2017. Tags: RAJENDRA GUPTA SONG VICTIMS REGISTER
कागज के ये नोट है बाबू कागज के ही नोट...गीत -
तमनार, जिला-रायगढ़ (छत्तीसगढ़) से राजेंद्र गुप्ता एक गीत सुना रहे हैं :
कागज के ये नोट है बाबू कागज के ही नोट – कागज की ये माया इनके नियत में है खोट जी – चले गाँव की ओर जी – अजी सांचे के ये रंग अनेक जी सांचे के ही ढंग – अरे बाबू जैसी करनी वैसी भरनी चले शहर की ओर...


