भसुर शाला खोल ताला, आइल बानी सून के...भोजपुरी विवाह गीत-
ग्राम-गोइयां, पोस्ट-अधौरा, जिला-कैमूर भभुआ (बिहार) से मोहन सिंह एक भोजपुरी विवाह गीत सुना रहे हैं :
भसुर शाला खोल ताला, आइल बानी सून के-
खोल के दिखावना ता गारी, देबवा चुन के-
पीतल के गहन के सोन के बतावेला-
ये शाला के भकुरा के लाजो नहीं आवे ला...
Posted on: Apr 25, 2017. Tags: MOHAN SINGH SONG VICTIMS REGISTER
भौंरा और गोबर कीड़ा की कहानी...
ग्राम पहाड़ कोरवा, जिला-सूरजपुर (छत्तीसगढ़) से मोहनलाल यादव एक कहानी सुना रहें है :
भौंरा और कीड़ा (गोबर) मित्र थे उन दोनों ने एक साथ जगत घूमने का फैसला लिया कीड़ा (गोबर) सबसे पहले गोबर कन्डो में ले गया पूरे दिन घूमने के पश्चात् जब भौंरे को भूख लगी तब दोनों राजा जी के बगिया में फूल का रस चूसने के लिए गए तभी कीड़ा (गोबर) भौरा के देखा-देखी फूलों को चूसने लगा और कमल फूल में जा बैठा। शाम का समय था तो कमल सिकुड़ गया और कीड़ा वहीं अन्दर फंस गया. सुबह राजा ने अपने माली को कहा जाओ फूल तोड़ लाओ हमे शिव मंदिर जाना है तब माली वही फूल ले आता है जिसमे कीड़ा रहता है फिर राजा पूजा आर्चना कर फूल चढ़ाते है जिसके पश्चात पुजारी अवशेष को गंगा में छोड़ आते है जिससे कीड़ा (गोबर) गंगा स्नान से तर जाता है...
Posted on: Apr 18, 2017. Tags: MOHANLAL YADAV SONG VICTIMS REGISTER
रनभन-रनभन हो मोर भुइया के देवता रनभन हो...जस गीत
ग्राम-छतरपुर, विकासखण्ड-घुघरी, जिला-मंडला (मध्यप्रदेश) से मोहन मरावी देवी जस गीत सुना रहे हैं यह गीत चैत नवरात्रि के अवसर पर गाया जाता है:
रनभन-रनभन हो-
मोर भुइया के देवता रनभन हो-
समार रे देवता रनभन-रनभन हो-
समार के दादा रनभन -रनभन हो – रनभन-रनभन होते बड़ा देव-
श्रृष्टि ला तारन हारा...
Posted on: Apr 07, 2017. Tags: MOHAN MARAWI SONG VICTIMS REGISTER
वर्षा जल को रोकिये, हर बूँद का हो काम...पानी पर कविता-
ग्राम-छतरपुर, विकासखण्ड-घुगरी, जिला-मंडला (मध्यप्रदेश) से मोहन मरावी सूखे और पानी के उपयोग पर एक कविता सुना रहे हैं :
पानी मत धोव पानी है अनमोल ,नहीं चुका सकते हम पानी का मोल-
धरती पे पानी नहीं बढ़ रहा है पाप ,खुदिर पड़ता जा रहा किसी का संसार – वर्षा जल को रोकिये,हर बूद का हो काम – चीपर में पोखर बने गाव-गाव में तालाब – पानी का हम मोल समझे ,पानी सबकी जान – कुढ़ देह थक जायेंगे जब संकट होगी ज्ञान – सुखती धरती मागे पानी ,पानी मागे पेड़-
बहता पानी रोकिये ,बने खेती के मेड...
Posted on: Apr 04, 2017. Tags: MOHAN MARAVI SONG VICTIMS REGISTER
नीम की टहनियों पर मचल उठा बोर...कविता
ग्राम-छतरपुर, विकासखण्ड-घुघरी, जिला-मंडला,(मध्यप्रदेश) से
मोहन मरावी गीत सुना रहे है :
नीम की टहनियों पर मचल उठा बोर-
आया है ऊमस भरा गर्मी का दौर-
सूरज अब जल्दी ही जाता है-
जाग दिन भर बरसता है धरती पर आग-
हवा नहीं रख पती है गर्मी पर-
गोर लुवो के झोके से झुलस रहा दात-
गर्मी ने दे डाली कपड़ो को मात-
चली गई एसे में ठंडक की ठोर-
आता यदि बादल का टुकड़ा जिस ओर-
फैलाते उसके ही आगे हम हाथ-
थोड़ी सी छाव तभी होती सर मोर-
दिन भर के बाद कही आती जब शाम-
तब जा के मिल पाता मन को आराम-
मगर रात में होती अकुलाहट और...
