काहे कहे रे बाबू जी दुरंग नीतिया...बेटा-बेटी भेदभाव गीत
किलकारी बाल केंद्र जिला-मुजफ्फरपुर (बिहार) से शशि कुमारी लड़का-लड़की के बीच भेदभाव पर एक गीत सुना रही हैं:
काहे कहे रे बाबू जी दुरंग नीतिया-
बेटा के जन्म पर तू वर भैया-
हमारी बेटिया काहे कहे बाबू जी...
बेटा के खेलावे खातिर-
मोटर से गरिया हमारी बेरिया-
काहे कहे रे बाबू जी-
बेटे को पढाई खातिर भेजे इस्कूलवा
काहे आंसू बहावन हमार बेटिया...
Posted on: Feb 28, 2018. Tags: SHASHI KUMARI SONG VICTIMS REGISTER
बहुत प्यार करते है झंडे से हम...देशभक्ति गीत -
ग्राम-रामनगर, पोस्ट-महेवा, जिला-बलरामपुर (छत्तीसगढ़) से शांति कुमारी 26 जनवरी के उपलक्ष में एक देशभक्ति गीत सुना रही है:
बहुत प्यार करते है झंडे से हम-
कसम चाहे ले लो वतन की कसम-
बहुत प्यार करते है भारत से हम-
हमारी गजल है तसउर तुम्हारा-
वतन के बिना अब न जीना हमारा-
बहुत प्यार करते है झंडा से हम...
Posted on: Jan 27, 2018. Tags: SHANTI KUMARI SONG VICTIMS REGISTER
तरी हरी नानी मोरे नाना, नाना रे नाना...सुहा गीत -
ग्राम-बनौली, पंचायत-बांसकुण्ड, जिला-कांकेर (छत्तीसगढ़) से बबिता कुमारी एक सुहा गीत सुना रही है:
तरी हरी नानी मोरे नाना, नाना रे नाना-
सुहना के तरी हरी नाना रे न-
चंदा सूरज तोरे पहिया परौतना रे-
सुहना के तरीया जन्म जन देबे-
नारे सुहना के तिरिया जन्म जन देबे-
तरी हरी नानी मोरे नाना, नाना रे नाना...
Posted on: Jan 08, 2018. Tags: BABITA KUMARI SONG VICTIMS REGISTER
गर्भहीं अधमोख झूले मल मूत्र भारेल हो...सोहर गीत -
ग्राम-रामनगर, पोस्ट-महेवा, जिला-बलरामपुर (छत्तीसगढ़) से कुमारी शांति एक सोहर गीत सुना रही हैं. यह गीत बच्चे के जन्म के समय पर गाया जाता है :
गर्भहीं अधमोख झूले मल मूत्र भारेल हो – संतो जठर गेनी बहु संसावे संकट गर्भ होवेल हो – तलफी तड़प जीव मारेल मुख बोल ना पावेल हो – संतो करुणा करिके पछताता अरुचि स्वांस ना आवेली हो – कास दुःख यह का हो मित्र संगिन देखेन हो – संतो पिछला जनम सुधि आवे समुझी मन विवेकन हो...
Posted on: Dec 03, 2017. Tags: KUMARI SHANTI SONG VICTIMS REGISTER
जिया डोले रे गूंजे पायलिया के शौर...छत्तीसगढ़ी गीत -
ग्राम-रामनगर, पोस्ट-महेवा, जिला-बलरामपुर (छत्तीसगढ़) से कुमारी शांति एक छत्तीसगढ़ी गीत सुना रही है:
जिया डोले रे गूंजे पायलिया के शौर-
मन होल-होल प्रेम रस घोले-
सांज सबेरा भौर-
कौन तो बाँधी रे लाल पगड़िया-
जिया डोले रे गूंजे पायलिया के शौर...

