कावन लगावे माता आमा अमलिया...भजन गीत
ग्राम-उड़ारी परसा पारा, पोस्ट-बरसीकला, थाना-चलगली, तहसील-वाड्रफनगर, जिला-बलरामपुर (छत्तीसगढ़) से चंदर शाह एक भजन गीत सुना रहे हैं:
कावन लगावे माता आमा अमलिया-
कावन लगावे घने बांस के माई-
राजा लगावे माता आमा अमलिया गे-
रानी लगावे घने बांस वो माई-
कैसन दीसे माता आमा अमलिया गे-
कैसन दीसे घन बांस के माई...
Posted on: Jan 30, 2018. Tags: CHANDRA SHAH SONG VICTIMS REGISTER
Near my village Forest officers selling wood from forest, complaints dont work
Ramchandra Yadav from Rapapara, Sanmohar, tehsil – Bharatpur, district- Koriya, Chhattisgarh is alleging that local forest officers are selling logs from forests for personal benefits. He says some logs are even lyin on the roadside. The event was brought to the attention of the D.F.O but to no effect. The matter was raised on different platforms but that too didn’t work. Pls call on Forest minister@07712221221 , S.D.M.@ 98069550866, D.F.O @7974428210. Yadav@9294528864
Posted on: Jan 30, 2018. Tags: FOREST RAMCHANDRA YADAV SONG VICTIMS REGISTER
अब की जनवरी दिन आया न रूपा डेम...सरगुजिहा प्रेम गीत
ग्राम-उडारी परसापारा, थाना-चलगली, तहसील-वाड्रफनगर, जिला-बलरामपुर (छत्तीसगढ़) से चन्द्रसाय एक सरगुजिहा प्रेम गीत सुना रहे है:
अब की जनवरी दिन आया न रूपा डेम-
हसी फटाका बाड़ीकर खेलब तो ये गेम-
ये कहल याद रखना ये सनम भूल न जाना-
चुडा में सजाके अबे कौना बकर हार-
झील के किनारे मोये करब इंतजार-
ये कहल याद रखना ये सुमन भूल न जाना...
Posted on: Jan 29, 2018. Tags: CHANDRASAAY BALRAMPUR SONG VICTIMS REGISTER
अभी खबर दिल्ली से आई...कविता -
ग्राम-लुडूटोला, विकासखंड-पंडरिया, जिला-कबीरधाम (छत्तीसगढ़) से चांदनी पंदराम एक कविता सुना रही है:
अभी खबर दिल्ली से आई-
मक्खी रानी उसको लाई-
टिड्डे ने हाथी को मारा-
हाथी क्या करता बेचारा-
घुस बैठा मटके के अंदर-
मटके में थे ढाई बंदर-
उन्हें देखकर हाथी रोया-
रोते-रोते ही वह सोया-
रुकी न पर आँसू की धारा-
मटका बना समंदर खारा-
लगे डूबने हाथी बंदर...
Posted on: Jan 27, 2018. Tags: CHANDANI PANDRAM SONG VICTIMS REGISTER
मोर टोपी पिन्हैया कहाँ गे, मोर भाषण देवइया कहाँ गे...छत्तीसगढ़ी रचना -
राजेन्द्र गुप्ता तमनार, जिला-रायगढ़ (छत्तीसगढ़) से एक स्वरचित रचना सुना रहे हैं-
मोर टोपी पिन्हैया कहाँ गे,मोर भाषण देवइया कहाँ गे-
अग्यारह लाख रुपया के मोटर में चढ़के गरीबी हटइया कहाँ गे-
मोर बैरी ला खोजत हंव,मोर दुश्मन ला खोजत हंव-
बैसाखू के सुध-बुध भुलागे,बैसाखू के सुध-बुध भुलागे-
ओखर चार खांडी के डोली हर कोशा बारी म घेरागे-
मोर टोपी पिन्हैया कहाँ गे,मोर भाषण देवइया कहाँ गे-
अग्यारह लाख रुपया के मोटर में चढ़के गरीबी हटइया कहाँ गे...
