10 साल से हैंडपंप खराब पड़ा है, 1 किलोमीटर दूर से झिरिया का गंदा पानी पीकर बीमार पड़ रहे हैं...
बिरहुलडीह, ग्राम पंचायत-पोलमी, तहसील-पंडरिया, जिला-कबीरधाम (छत्तीसगढ़) से सुखराम मिथिलेश मानिकपुरी को बता रहे है कि उनके गांव का हैण्डपम्प खराब हो गया है 1 किलोमीटर दूर से नाले और झिरिया का गंदा पानी लाकर पीते है गंदा पानी पीकर सभी लोग बीमार पड़ रहे हैं. गाँव में 60 घर की बस्ती है और सभी परेशान हैं. इसके लिए उन्होंने ग्राम सभा में कई बार आवेदन किया है तो बोलते है कि हो जायेगा लेकिन आज 10 साल से अधिक हो गया लेकिन आज तक कोई सुनवाई नहीं हो रही है| इसलिए साथी सीजीनेट के साथियों से मदद की मांग कर रहे है कि इन नम्बरों में बात कर हैण्डपम्प सुधरवाने में मदद करें: P.H.E.@9893458404, सरपंच@9752988847.
Posted on: Aug 22, 2018. Tags: CHHATTISGARH KABIRDHAM SONG SUKHRAM VICTIMS REGISTER WATER
हमारे गाँव का नाम सालेभाट कैसे पड़ा : एक गाँव की कहानी-
ग्राम पंचायत-सालेभाट, तहसील-नरहरपुर, जिला-उत्तर बस्तर कांकेर (छत्तीसगढ़) से सीजीनेट जन पत्रकारिता जागरूकता यात्रा के अंकित पडवार के साथ में आज सुखराम वट्टी (गाँव के पटेल) हैं जो उनको बता रहे है कि उनके गाँव का नाम सालेभाट कैसे पडा: ग्राम सालेभाट जो वनांचल के नजदीक प्रकृति की गोद में बसा एक ख़ूबसूरत गाँव है, जहाँ लगभग 900 लोग निवास करते हैं क्योंकि उनके गाँव में पहले के ज़माने से लेकर अभी तक साल के बहुत पेड है जिससे दरवाजे, टेबल, कुर्सी आदि बनाये जाते है. यह पेड़ यहां अधिक मात्रा में होता है, इसलिए उनके गाँव का नाम सालेभाट पड़ा |
Posted on: Jul 24, 2018. Tags: KANKER SONG SUKHRAM WATTI VICTIMS REGISTER
क्योम-क्योम केहिता ताका डोंगुमेटा ते जलियो येनदी ता...गोंडी गीत
ग्राम-रोड़ावाई, तहसील-धनोरा, जिला-गढ़चिरोली (महाराष्ट्र) से उत्तम अटला एक गोंडी गीत सुना रहे है :
क्योम-क्योम केहिता ताका डोंगुमेटा ते जलियो येनदी ता-
वायेन इचोन दोहेना ताका डोंगुमेटा ते जलियो येनदी ता-
वायोन आयो वायिना ताका डोंगुमेटा ते जलियो येनदी ता...
Posted on: Apr 20, 2017. Tags: SONG SUKHRAM ATALA VICTIMS REGISTER
रे रेलों लोयो रे रेला रे रेला रे लोयो रे रेला...गोंडी गीत
ग्राम-रोंडावाई, पोस्ट-घट्टा, तहसील-धनोरा, जिला-गढ़चिरोली (महाराष्ट्र) से दीपिका मडावी एक गोंडी गीत सुना रही हैं:
रे रेलों लोयो रे रेला रे रेला रे लोयो रे रेला-
अगा डुकेती मडा कोडी ते रे डुकेती-
मडा फुरुंग ते तुरसा डुकेती-
आहके वियादे आचा गियादी-
बाई फला ते ओन गियादी निवा देश ते
रे रेलों लोयो रे रेला रे रेला रे लोयो...
Posted on: Mar 29, 2017. Tags: SONG SUKHRAM ATALA VICTIMS REGISTER
आदिवासी को अधिकतर रोज़गार जंगल से ही मिलता है, बरसात के समय हम खेत में काम करते हैं...
ग्राम-कुतेगाँव, तहसील-धनोरा, जिला-गढ़चिरोली (महाराष्ट्र) से मीना मडावी के साथ में सुखराम अटाला ग्राम-रोंडावाई, तहसील-धनोरा, जिला-गढ़चिरोली के रहने वाले है और अभी वो जिला-अनूपपुर मध्यप्रदेश में है बता रहे है कि आदिवासी समाज में किस तरह से वे अपना जीवन यापन करते है और किस तरह से रोजगार मिलता है उसके बारे में जानकारी दे रहे है, वे कह रहे हैं कि आदिवासी मूलत: जंगल पर ही अपने जीवन के लिए निर्भर होता है जहां से उसे जीवनयापन के लिए बहुत सी चीज़ें मिलती हैं. बारिश के समय में लोग मजदूरी करने लिए अपने और दूसरो के यहाँ जाकर भी खेत का काम भी करते है जैसे जोतना, बोना, निदाई करना ये उनके लिए एक रोजगार भी होता है| ऐसा वे गोंडी बता रहे है| मीना@7719930515


