पापा मुझको वीर भगत या खुदीराम बना दो ना...रचना -
मालीघाट, जिला-मुजफ्फरपुर (बिहार) से सुनील कुमार राजेश चौधरी की रचना सुना रहे है:
पापा मुझको वीर भगत या खुदीराम बना दो ना-
आजादी के लिए मरुंगा मैं-
मुझे शहीद बनादो ना-
कास मुझे भी फाँसी मिलतीं-
कालापानी मुझको मिलता-
कहलाता मैं वीर सेनानी-
यह हक मुझे दिलादो ना-
आंग्रेज़ो को मार भगाता-
गोरों पर आतंक मचाता-
सीना में बारूद छूपाये-
दुश्मनों का महल उड़ाता-
ऐसा सबक सिखादो ना-
धरती माँ के काम मैं आउ-
दुश्मन को मैं मार गिराऊं-
वह ब्रामस्त्र दिलादो ना – देश के खातिर मेरे सर को-
सीमा पर चढ़ा दो ना-
चंद्रशेखर आजाद हमारे-
पुण्यभूमि को प्राप्त हुये-
राजगुरू और बिश्मिलाखां-
हँसते हँसते प्राण दिए-
मैं भी चाहू उनसा बनना-
पापा मुझे बना दो ना...
Posted on: Jan 18, 2018. Tags: SONG SUNIL KUMAR VICTIMS REGISTER
घर-घर अलख जगायेंगे हम बदलेंगे जमाना...जागरूकता गीत -
जिला-बडवानी (मध्यप्रदेश) से सुरेश कुमार एक जागरूकता गीत सुना रहे है:
घर-घर अलख जगायेंगे हम बदलेंगे जमाना-
बदलेंगे जमाना भाई बदलेंगे जमाना-
निश्चय हमारा द्रंडता अटल है-
काया की रग-रग में निष्ठा का बल है-
जाग्रति शंक बजायेंगे हम बदलेंगे जमाना-
घर-घर अलख जगायेंगे हम बदलेंगे जमाना...
Posted on: Jan 18, 2018. Tags: SONG SURESH KUMAR VICTIMS REGISTER
इस दहेज़ ने ही फैलाया भारी अत्याचार है...दहेज़ प्रथा विरोधी कविता -
जिला-बडवानी (मध्यप्रदेश) से सुरेश कुमार एक दहेज़ प्रथा विरोधी कविता सुना रहे है:
इस दहेज़ ने ही फैलाया-
भारी अत्याचार है-
इस दानव को मार भगाओ-
यह समाज का भार है-
पुत्र जन्म लेते ही घर में-
लहर ख़ुशी की छा जाती-
लेकिन कन्या इस धरती पर-
एक समस्या बन जाती-
कैसे हाथ करेंगे पीले-
जब अभाव घर में धन का...
Posted on: Jan 18, 2018. Tags: SONG SURESH KUMAR VICTIMS REGISTER
स्वच्छता के अलख को...स्वच्छता गीत -
ग्राम-तेलंमा, पंचायत-भेजा, जिला-कांकेर (छत्तीसगढ़) से राकेश कुमार पटेल स्वच्छता पर आधारित एक गीत सुना रहे है:
स्वच्छता के अलख को-
तुम भी जगा पाओगे-
खुद भी जाग जाओगे-
दूसरो को भी जगाओगे-
करके जरा देखो तो-
कितना मजा पाओगे-
स्वच्छता के अलख को...
Posted on: Jan 18, 2018. Tags: RAKESH KUMAR PATEL SONG VICTIMS REGISTER
सबको बेटा चाहिए तो बेटी कहां जायेगी...बेटियों पर कविता -
ग्राम-कुकदुर, तहसील-पंडरिया, जिला-कबीरधाम (छत्तीसगढ़) से राकेश कुमार मानिकपुरी बेटियों पर एक कविता सुना रहे है:
सबको बेटा चाहिए तो बेटी कहां जायेगी-
ये सोचकर कब तक हत्याएं करवाएगी-
दुनिया में जब एक दिन बेटियां न नजर आएगी-
तो आपके बेटो की बहु कहां से आएगी-
बेटे का सम्मान जगत में बेटी का सम्मान नही-
दुनिया वाले मुझे बता दो बेटी क्या संतान नही...


