अरे हीरा हस दहियां गंवाया हो...नशा विरोधी गीत
मध्यप्रदेश के जिला-सीधी, पोस्ट-लुरघुटी, ग्राम-ददरी से मनोज कुमार एक नशा विरोधी गीत सुना रहे हैं:
अरे हीरा हस दहियां गंवाया हो-
दारू गांजा पीके-
लड़का-लड़की बिहावन को हो गई-
रो-रो करी घरवाली हो-दारु गांजा पीके...
Posted on: Feb 16, 2018. Tags: MANOJ KUMAR SONG VICTIMS REGISTER
सरकार न्यूनतम समर्थन मूल्य में अब दोगुने, 24 की जगह 50 लघु वन उत्पाद आदिवासी से खरीदेगी...
सरकार न्यूनतम समर्थन मूल्य में अब दोगुने वन उत्पाद खरीदेगी। इस कदम से भारत भर में 5 करोड़ आदिवासियों को लाभ पहुंच सकता है, यदि बाजार मूल्य नीचे से गिरता है, तो राज्य सरकारें गांव के हाट और मंडियों में न्यूनतम समर्थन मूल्य पर खरीद के लिए आगे बढ़ेगी। इसके बाद उन्हें बाजार में कीमतों में वृद्धि होने पर बेच दिया जाता है। राज्य सरकारों द्वारा किसी भी हानि के मामले में 75% भुगतान केंद्र सरकार और 25% हानि राज्य सरकार वहन करेगा:
https://economictimes.indiatimes.com/news/economy/policy/centre-to-double-minor-forest-produce-numbers-for-a-guaranteed-msp/articleshow/62781811.cms
Posted on: Feb 15, 2018. Tags: RAKESH KUMAR SONG VICTIMS REGISTER
दोस्त अब थकने लगे हैं, किसी का पेट निकल आया है, किसी के बाल पकने लगे हैं...कविता
मुजफ्फरपुर (बिहार) से सुनील कुमार एक कविता सुना रहे हैं:
दोस्त अब थकने लगे हैं किसी का पेट निकल आया है किसी के बाल पकने लगे हैं-
सब पर भारी जिम्मेदारी है सबको छोटी-मोटी कोई बीमारी है-
दिन भर जो भागते दौड़ते थे वो अब चलते-चलते रुकने लगे हैं-
पर ये हकीकत है सब दोस्त थकने लगे हैं-
किसी को लोन की फ़िक्र है किसी को हेल्थ टेस्ट का जिक्र है-
फुर्सत की सबको कमी है आँखों में अजीब सी नमी है-
कल प्यार के ख़त लिखते थे आज बीमें के फार्म भरने लगे है...
Posted on: Feb 15, 2018. Tags: KUMAR SONG SUNIL VICTIMS REGISTER
माता रेवा मईया नैया हमारी पार लगा दो हो माँ...नर्मदा वन्दना
माता रेवा मईया नैया हमारी पार लगा दो हो माँ – तोर मंगर परे किन्ह सवारी हाथ कमल का फूल-
सबको देती रिद्धि सिद्धि हमें गयी क्यूँ भूल-
माता रेवा मईया नैया हमारी पार लगा दो हो माँ...
Posted on: Feb 15, 2018. Tags: Ramkumar Dindori SONG VICTIMS REGISTER
रोज-रोज बतिया हम जोहरी तोहार हो नौजवान भइया...बिहारी विकास गीत
पंचायत चुनाव प्रचार के दौरान मुजफ्फरपुर (बिहार) से अज्म शाहनी एक विकास गीत सुना रहे हैं :
रोज-रोज बतिया हम जोहरी तोहार हो नौजवान भइया-
पंचायत के तुहि करनधार हो नौजवान भइया-
कहिया ले चारो ओर एकता बनइब हो-
कहिया ले जुलमिन के जुलम मिटइब हो-
कहिया ले देबा नया युग के विचार हो-
नौजवान भइया...
कहिया ले जाइ अपने गावं से बेकारी-
कहिया ले छूटी भूख पेट की बीमारी हो-
कहिया ले सहल जाई महँगी के मार हो-
नौजवान भइया...
कहिया ले होइ हमनि के सुनवाई हो-
कहिया ले धना के गो लागे लेके जाई हो-
तोहरे पर लगल बाटेअसरा हमार हो-
नौजवान भइया...
तुहि कुछ सोचवा त तुहि कउनो रहो
तुहि कुछ करवा त होइ कउनो छाहो
तोहरे पर लगल बाटे असरा हमार हो
नौजवान भइया...

