ये फैसले का वक्त है तू आ कदम मिला...
ये फैसले का वक्त है, तू आ कदम मिला
ये इम्तहान सत्य है तू आ कदम मिला
हर दिशा से भोर से सूरज निकल रहे
आसमा में लाल फरेरे मचल रहे
मुक्ति कारवां से कारवान मिल रहे
तू बोल किसके साथ है तू आ जरा बता
ये फैसले का वक्त...
कैद में पड़ी हुई जमी बुला रही
खींचती हुई ये मशीने बुला रही
ये जंग इन्कलाब है, तू आ लहू मिला
ये फैसले का...
गा रही अँधेरी रात में दिए की लौ
इस जहाँ से अंधकार को समेट दो
हर ओर जिंदगी की रौशनी बिखेर दो
ये जिंदगी का गीत है जिन्दा लबों से गा
Posted on: Dec 13, 2013. Tags: Sunil Muzaffarpur
भाषण में गरीब कहके साशन करे हे...मगही लोकगीत
भाषण में गरीब कहके साशन करे हे
जब माँगा ही मजुरिया तो लाठी मारे हे
कुर्सी पर भी उकरे पिता कितरा विपद सुनाओ
धीरज के कपड़ा ने कब ले हारन लोर चुकाओ
लेहुआ के लकड़ी पर पापी लैम्बो गा रहे
