आओ मिलकर पेड़ लगाये हरा भरा ये देश बनाये...पर्यावरण गीत
जिला-रीवा (मध्यप्रदेश) से प्रीतमलाल प्रजापति एक कविता सुना रहे है:
आओ मिलकर पेड़ लगाये-
हराभरा ये देश बनाये-
वातावरण को स्वच्छ बनाकर-
इस जीवन को स्वास्थ बनाये-
पेड़ न कोई कटने पायें-
मिलकर हम ये सब कसम खाएं-
पेड़ देते है वायु जीवन इसमें हो दीर्घायु – खुद समझे ओरो को बताये-
आओ मिलकर पेड़ लगाये-
हरा भरा ये देश बनाये...
Posted on: Nov 09, 2017. Tags: PRITAMLAL PRAJAPATI SONG VICTIMS REGISTER
अमरई-अमरई वातोना जीजा निवा खबर अना वातोना...गोंडी गीत -
ग्राम-पाठई, पोस्ट-कौड़िया, तहसील-पांदुर्ना, जिला-छिन्दवाड़ा (मध्यप्रदेश ) से सपना वट्टी एक गोंडी गीत सुना रही है, इस गीत को जब साला अपने जीजा के यहाँ मेहमान जाता है तब गाया जाता है:
अमरई-अमरई वातोना जीजा निवा खबर अना वातोना-
सीजीनेट स्वर तल वातोना जीजा निवा खबर अना वातोना-
बुल्टू रेडियो तल वातोना जीजा निवा खबर अना वातोना-
आदिवासी स्वर तल वातोना जीजा निवा खबर अना वातोना...
Posted on: Nov 08, 2017. Tags: SAPNA WATTI SONG VICTIMS REGISTER
एक कभी शब्द सुना था सगरो सुबह शाम दोपहर में...गीत
जिला-रीवा (मध्यप्रदेश) से प्रीतमलाल प्रजापति के साथ में मनीष कुमार है जो एक गीत सुना रहे हैं :
एक कभी शब्द सुना था सगरो सुबह शाम दोपहर में-
जय भीम गूंजता महू घर में भीम बाबा के शहर में-
गली-गली चौक चौराहा गूजे सबके नजर में-
हर जुबा पे भीम के नाम हवे एक ही मंजिल पैगाम हवे-
भीम नाम कि शक्ति बढ़ जाई मंजिल हमेश न छुट पाई-
एक कभी शब्द सुना था सगरो सुबह शाम दोपहर में...
Posted on: Nov 04, 2017. Tags: PRITAMLAL PRAJAPATI SONG VICTIMS REGISTER
कौन है-कौन है कहाँ से वो आया...गीत
ग्राम-बालुद (फुलवारी माझीपारा), जिला-दंतेवाडा (छत्तीसगढ़) से उपदेश ठाकुर, रुद्रप्रताप ठाकुर एक गीत सुना रहे है:
कौन है-कौन है कहाँ से वो आया-
चारो दिशाओं में तेजेचा वो छाया-
उसकी भुजाये उसकी कथाएं-
आधी रथ तेरी तरफ शिव जी तेरी तरफ-
देखो जरा ये विचित्र माया-
कौन है-कौन है कहाँ से वो आया...
Posted on: Oct 18, 2017. Tags: SONG UPDESH THAKUR RUDRAPRATAP THAKUR DANTEWADA VICTIMS REGISTER
संस्कार वह मोहर (गहना) है जो जीवन के सिक्के को बहुमूल्य बना देती है...सुविचार -
प्रीतमलाल संस्कारो का जीवन में महत्व को बताते हुए कह रहे हैं, संस्कार वह मोहर (गहना) है जो जीवन के सिक्के को बहुमूल्य बना देती है. यहाँ तो वही मिलता है जो हम लुटाते हैं। ज्ञान के अनुरूप आचरण होने से जीवन में क्रांतिकारी परिवर्तन संभव होता है आदर्शों की प्रशंसा तो सभी कर सकते है लेकिन इन्हें अपने जीवन में उतरना कठिन होता है. ये कह रहे हैं धन से केवल सुविधा प्राप्त की जा सकती है सुख नही. बुद्धि से नही ह्रदय से जीएं क्योंकि बुद्धि में विचार होते है विवेक नही साथ ही प्रशंसा को कुवारी कन्या कहते हुए कहते हैं इसे सज्जन पसंद नही करते और ये दुर्जनों को पसंद नही करती, प्रशंसा एक मदिरा भी है जिसे कानो से पीया जाता है. दीर्घ जीवन स्मरणीय हो ना हो लेकिन स्मरणीय जीवन दीर्घ होता है | प्रीतमलाल@9522824525

