हर आदमी को आदमी से, प्यार चाहिए...
सुनील कुमार, मुज़फ्फरपुर, बिहार से एक जन गीत प्रस्तुत रहे हैं:
हर आदमी को आदमी से, प्यार चाहिए
जीने के लिए जीने का, अधिकार चाहिए
हर आदमी को आदमी से, प्यार चाहिए
किरदार कितने लोगों के, बेकार हो गए
मासूम बेटियों के, खरीदार हो गए
पत्ते पहनके उम्र-सजा, काटने वाले
हैवान इस मुल्क के, सरदार हो गए
जल-जंगल-जमीन, हो ये जनता के अधीन
जीने के लिए रोटी-कपडा-मकान चाहिए
हर आदमी को आदमी से....
इक्कीसवीं सदी का, करिश्मा है दोस्तों
आजादी के बाद, अब स्वराज चाहिए
हर आदमी को आदमी से .......
Posted on: Oct 29, 2014. Tags: SONG Sunil Muzaffarpur VICTIMS REGISTER
तोहार देशवा गुलाम होई जाई, लड़ाई तोहरा लेवे के परी...भोजपुरी गीत
सुनील कुमार भारतीय नाट्य संघ (इप्टा), मुजफ्फरपुर (बिहार) में चल रहे प्रेमचन्द्र समारोह से संगीतकार व फिल्मकार डॉ.कु.विरल से एक भोजपुरी गीत रिकॉर्ड करवा रहे हैं:
तोहार देशवा गुलाम होई जाई, लड़ाई तोहरा लेवे के परी
तोहके आके अब केहू बा बचाई, लड़ाई तोहरा लेवे के परी
गाछ बीज पेटेंट बा गंगा के पानी, खाद डीजल महँगा बा, सुनि ला कहानी
तोहरा खेतवा में बिया ना बोवाई, लड़ाई तोहरा लेवे के परी
तोहर देशवा गुलाम होई जाई........
कल-कारखाना बंद खेती-बाड़ी उजडल, नौकरी के चक्कर में जन-समूह उमडल
तोहर रेत-रेत गरदन कटाई, लड़ाई तोहरा लेवे के परी
तोहर देशवा गुलाम होई जाई...
पेप्सी-कोला, थम्सप औ बियर पिलाई, हाथे-हाथे तोहके मोबाइल धराई
तोहके सपना में मारुति देखाई, लड़ाई तोहरा लेवे के परी
तोहर देशवा गुलाम होई जाई...
कवि-साहित्यकार सब पेटेंट हो गइले, बुद्धिजीवी विदेशियन के एजेंट हो गइले
अब त लफुआ चुनाव जीत जाई, लड़ाई तोहरा लेवे के परी
काहे बइठल तू लेवे ला जम्हाई, लड़ाई तोहरा लेवे के परी
Posted on: Aug 04, 2014. Tags: SONG Sunil Muzaffarpur VICTIMS REGISTER
हाय-हाय के जात हाजीपुर, के जात पटना...बिहार से झरनी लोकगीत
साथी सुनील मुजफ्फरपुर, बिहार से एक झरनी लोकगीत गा रहे हैं. लोग बांस का छोटा-छोटा झाडू बनाकर समूह में इस गीत को गाते-बजाते और नाचते भी हैं:
हाय-हाय के जत हाजीपुर, के जत पटना
के जत बेतिया शहरवे हाय-हाय
हाय-हाय बाबा जत हाजीपुर, भइया जत पटना,
स्वामी जत बेतिया शहरवा, हाय-हाय
हाय-हाय के लैते सारी सुगवा, के लैते कंगना
के लैते सिर के सिंदुरवे हाय-हाय
हाय-हाय पापा लैते सारी सुगवा, भइया लैते कंगना
स्वामी लैते सिर के सिंदुरवे, हाय-हाय
हाय-हाय के पहनते सारी सुगवा, भौजी पहनते कंगना
हम पहनबे सिर के सिंदुरवा हाय-हाय
हाय-हाय अम्मा पहनते सारी सुगवा
भौजी पहनते कंगना, हम पहनबे सिर के सिंदुरवा हाय-हाय
हाय-हाय फटी जाते सारी-सुगवा
टूट जाते कंगना, रह जाते सिर के सिन्दुरवे हाय-हाय.....
हाय-हाय फटी जाते सारी-सुगवा, टूट जाते कंगना,
रह जाते सिर के सिन्दुरवे हाय-हाय
हाय-हाय फटी जाते सारी-सुगवा, टूट जाते कंगना,
रह जाते सिर के सिन्दुरवे हाय-हाय.....
Posted on: Jul 31, 2014. Tags: SONG Sunil Muzaffarpur VICTIMS REGISTER
बाबू खेले अंगनवां रुनु-झूनू...सोहर गीत
इस संदेश अनीता कुमारी सोहर गीत सुना रही हैं, सोहर जब बच्चा पैदा होता है, तब खुशी में गाया जाता है...
रुनु-झूनू हो हो रुनु-झूनू हो हो रुनु-झूनू
बाबू खेले अंगनवां रुनु-झूनू
रुनु-झूनू हो हो रुनु-झूनू हो हो रुनु-झूनू
खेलतै-खेलत बाबू दादा के गोदिया रुनु-झूनू
दादा दिहले अशिषिया रुनु-झूनू
रुनु-झूनू हो हो रुनु-झूनू हो हो...
बाबू खेलें अंगनवां रुनु-झूनू...
खेलतै -खेलत बाबू दादी के गोंदिया रुनु-झूनू ,
दादी दिहले अशिषिया रुनु-झूनू ,
रुनु-झुनू हो हो रुनु-झूनू हो हो...
खेलतै-खेलत बाबू पापा के गोदिया रुनु-झूनू
पापा दिहले अशिषिया रुनु-झूनू
रुनु-झुनू हो हो रुनु-झूनू हो हो...
बाबू खेलें अंगनवां रुनु-झूनू
रुनु-झूनू हो हो रुनु-झूनू हो हो...
Posted on: Jul 15, 2014. Tags: SONG Sunil Muzaffarpur VICTIMS REGISTER
बरसे सावन धनधनवा रे...वर्षा गीत
मुजफ्फरपुर बिहार से साथी सुनील एक वर्षा गीत गा रहे हैं, जो झूमर शैली पर है.बारिश की फुहारों के बीच किसान अपने हांथों में हल-कुदाल लेकर निकल पड़ते हैं...
बरसे सावन धनधनवा रे, गुल लाइची-इलाइची
धनवा रोपेला किसनवा रे, गुल लाइची-इलाइची
बरसे सावन धनधनवा.....
चंडी कलेवा ले जनियाँ हो, गुल लाइची-इलाइची
सावन बनलबा बजनिया हो, गुल लाइची-इलाइची
लागे मसाहल वा कदवा हो, गुल लाइची-इलाइची
बलमा किसान मोरा रजवा हो, गुल लाइची-इलाइची
बीया सजोर डाला डटके हो, गुल लाइची-इलाइची
बांध रोपा घोंघा ना घुसके हो, गुल लाइची-इलाइची
धरती गढ़ावे आवरनवा हो,गुल लाइची-इलाइची
बरसे सावन धनधनवा रे,गुल लाइची-इलाइची
धनवा रोपेला किसनवा रे, गुल लाइची-इलाइची
धनवा रोपेला .........
