खूब लिखा माँ की ममता पर, दर्द पिता का रहा अनजाना...पिता पर कविता -
जिला-बडवानी (मध्यप्रदेश) से सुरेश कुमार पिता से सम्बंधित एक कविता सुना रहे है:
खूब लिखा माँ की ममता पर-
दर्द पिता का रहा अनजाना-
माँ के आंसू सब ने देखे-
त्याग अपना कोई न जाना-
जीवन में पहचान जरुरी-
कौन है खोटा कौन है खरा-
धुप छाँव का खेल है जीवन-
जीवन में संघर्ष भरा है...
Posted on: Dec 18, 2017. Tags: SONG SURESH KUMAR VICTIMS REGISTER
छोटी सी उमर मा मारी शादी कराय दी...बारेली भाषा में गीत -
जिला-बडवानी (मध्यप्रदेश) से सुरेश कुमार बारेली भाषा में एक आदिवासी गीत सुना रहे हैं:
छोटी सी उमर मा मारी शादी कराय दी-
नई मानयो दादा मारी शादी कराय दी-
शादी कराय दिन बड़ी धूम मचाय दी-
हंसने कूदन उमर पे रोक लगाय दी-
नई मानयो दादा मारी शादी कराय दी...
Posted on: Dec 17, 2017. Tags: SONG SURESH KUMAR VICTIMS REGISTER
किताबें कुछ कहना चाहती है, तुमारे सांथ रहना चाहती है...कविता -
बडवानी (मध्यप्रदेश) से सुरेश कुमार एक कविता सुना रहे हैं :
किताबें कुछ कहना चाहती है, तुम्हारे सांथ रहना चाहती है – किताबो में रॉकेट का राज है किताबो में साइंस की आवाज है – किताबो में कितना बड़ा संसार है, किताबो में ज्ञान का भण्डार है – किताबो में सबका राज है किताबो में सबका का ज्ञान है – दुनियां के इंसानो को आज को काम की एक एहसास की हर पल की – किताबे कुछ कहना चाहती है, पढने वालों के सांथ रहना चाहती है...
Posted on: Dec 13, 2017. Tags: SONG SURESH KUMAR VICTIMS REGISTER
आई ऋतु जब बसंत की, तन मन सब खिल उठा...कविता-
बड़वानी (मध्यप्रदेश) से सुरेश कुमार एक कविता सुना रहे हैं :
आई ऋतू जब बसंत की तन मन सब खिल उठा – तरु-तरु, डाली-डाली, अंग-अंग महक उठा – आई ऋतू जब बसंत की कोयल छिपकर आमो के पत्तो में – मनहोर गजल सी कूकती सबके मृदुल ह्रदय को छू गई – प्रकृति ने सिंगार है किया आज रंग बिरंगे महकते फूलो से – सामने पड़े है मोर किसानो में है उत्साह का शोर – मिल गया श्रम का मोल होली धुरेड़ी में सब मग्न हुए...
Posted on: Dec 13, 2017. Tags: SONG SURESH KUMAR VICTIMS REGISTER
मनुष्य जनम धनवारु रे रुहा माचू डूब रे...भीली गीत -
जिला-बडवानी (मध्यप्रदेश) से सुरेश कुमार एक भीली गीत सुना रहे है:
मनुष्य जनम धनवारु रे रुहा माचू डूब रे-
निमी जड़रियो जो अल्प निजोड़े-
कूदी कूदी नीर कूदी नीर रे-
तू सत्संग में जाया कर-
इत भगवान् न गाया कर-
संत संदारे बोसिन बैसो रे-
देव ध्यान लगाया कर-
मनुष्य जनम धनवारु रे रुहा माचू डूब रे...
