जहाँ जंगल है, वहाँ मंगल है, मीठे कंद-मूल मीठे फल हैं...कविता
जिला-राजनांदगांव (छतीसगढ़) से वीरेन्द्र गन्धर्व जंगल पर एक कविता सुना रहें हैं:
जहाँ जंगल हैं, वहाँ मंगल है-
मीठे कंदमूल मीठे फल हैं-
बहता हैं पावन अनीर – बहता हैं शीतल सलिल-
स्वस्थ रहते हैं निवासी-
प्रसन्न रहते हैं वनवासी-
गृह पट्टे का आधार मिले-
वन पर पूरा अधिकार मिले – यहीं दुआएं प्रतिपल हैं-
जहाँ जंगल है, वहाँ मंगल है-
