देखा हुआ सा कुछ है, तो सोचा हुआ सा कुछ...निदा फाज़ली की ग़ज़ल-

मालीघाट, जिला-मुजफ्फरपुर, बिहार से सुनील कुमार एक निदा फाज़ली की ग़ज़ल सुना रहे हैं :
देखा हुआ सा कुछ है, तो सोचा हुआ सा कुछ-
हर वक़्त मेरे साथ है, उलझा हुआ सा कुछ-
होता है यूँ भी रास्ता खुलता नहीं कहीं-
जंगल-सा फैल जाता है, खोया हुआ सा कुछ-
साहिल की गिली रेत पर बच्चों के खेल-सा-
हर लम्हा मुझ में बनता बिखरता हुआ सा कुछ-
फ़ुर्सत ने आज घर को सजाया कुछ इस तरह-
हर शै से मुस्कुराता है रोता हुआ सा कुछ-
धुँधली सी एक याद किसी क़ब्र का दिया-
और मेरे आसपास चमकता हुआ सा कुछ...

Posted on: Feb 15, 2019. Tags: SONG SUNIL KUMAR VICTIMS REGISTER

स्वतंत्र भारत अमर रहे मै मेरा कर्तव्य भारत...देशभक्ति कविता

साहेबगंज, जिला-मुज़फ्फरपुर (बिहार) से पेंटर मो.आयुब अंसारी एक कविता सुना रहे हैं:
स्वतंत्र भारत अमर रहे मै मेरा कर्तव्य भारत-
मै भारत भूमि में जन्म लिया भारतीयता मेरा धर्म ईमान-
हे माँ भारती तेरी रक्षा में खून का एक-एक कतरा कर दूँगा कुर्बान-
भारत भूमि मेरी मात-पिता समग्र भारत मेरा खानदान...

Posted on: Feb 14, 2019. Tags: SONG SUNIL KUMAR VICTIMS REGISTER

बाप कह्य्या बेटा, पढ्या, केना जन्य्या ऊ की कर्र्य्या...भोजपुरी कविता

ग्राम-बिसनपुर बकरी, जिला-मुजफ्फरपुर (बिहार) से सुनील कुमार एक भोजपुरी कविता सुना रहे है :
बाप कह्य्या बेटा, पढ्या, केना जन्य्या ऊ की कर्र्य्या-
आठ बजे सूत के उठ्य्या, बिना मुह धोइले चाय पियय्या-
खैनी खाएला लूस फूस, कर्र्य्या-
बिना नहेला, किना जव्य्या-
कहेला की आत्मा में, पढ्या-
लेकिन सात के पहाडा में, आठ बार भुलय्या...

Posted on: Feb 14, 2019. Tags: SONG SUNIL KUMAR VICTIMS REGISTER

उनको मालूम न कर, सताने की हद...रचना

मालीघाट, जिला-मुजफ्फरपुर (बिहार) से सुनील कुमार सुजीत कुमार की रचना सुना रहे है :
उनको मालूम न कर सताने की हद-
आप भी रखिए अपनी दीवानगी की हद-
इससे पहले की कोई रुसवाई हो-
जानिए इश्क को जनाते की हद-
अश्क बह जाना भी कभी, जरुरी है-
उनको मालूम न कर, सताने की हद...

Posted on: Feb 14, 2019. Tags: SONG SUNIL KUMAR VICTIMS REGISTER

भूख को रोटी दाल पै आना पड़ता है, जानबूझकर जाल पै आना पड़ता है...गज़ल

मालीघाट, जिला-मुजफ्फरपुर, (बिहार) से सुनील कुमार महेश कटारे सुगम की गज़ल सुना रहे है:-
भूख को रोटी दाल पै आना पड़ता है-
जानबूझकर जाल पै आना पड़ता है-
आसमान में चाहे जितना भी उड़ ले-
पंछी को फिर डाल पै आना पड़ता है-
ऐश करेगा कब तक कोई रहमत पर-
लौट के अपने हाल पै आना पड़ता है-
सच्चाई इक हद तक ढाँपी जाती है-
इक दिन तो पड़ताल पै आना पड़ता है-
अनदेखा कब तलक करोगे रिश्तों का-
जल्दी इस्तकबाल पै आना पड़ता है...

Posted on: Feb 13, 2019. Tags: SONG SUNIL KUMAR VICTIMS REGISTER

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