वनांचल स्वर: जंगल से मिलता है स्वादिष्ट और पौष्टिक भोजन...
ग्राम-धनेली कन्हार, तहसील-भानुप्रतापपुर, जिला-कांकेर (छत्तीसगढ़) से प्रेमलाल कोमरा बताते हैं कि इमली के बीज को आग में भूंजकर उसमें महुआ के फूल को डालकर पकाते हैं| तैयार हो जाने पर खाते हैं और बाज़ार ले जाकर बेच देते हैं| सरई के फूल को भी इमली के बीज की तरह भूंजकर उसमें महुआ के फूल को डाला जाता है, इसे मैंने भी खाया है| कांदा जो जंगल में पाया जाता है, इसे घर में नहीं रखा जाता है| कांदा स्वाद में बहुत कड़वा होता है, इसे भी पकाया जाता है, कांदा को अभी भी खाया जाता है| प्रेमलाल महुआ के लड्डू के भी बारे में बताते हैं, महुए के लड्डू बनाने के लिए महुए को सिलबट्टे या मिक्सी से पीसकर बनाया जाता है| ये सभी स्वास्थ्य के लिए अच्छे हैं जैसे इमली भूने हुए बीजों को खाने से पेट साफ़ होता है|(RM)
Posted on: Feb 27, 2021. Tags: CG KANKER PREMLAL KOMRA VANANCHAL SWARA
वनांचल स्वर: घटते जंगल बढ़ती परेशानियां...
ग्राम-हिटारकसा, तहसील-भानुप्रतापपुर, जिला-कांकेर (छत्तीसगढ़) से नारायण सिंह साहू बताते हैं कि उनके गांव में आए दिन भालू आ जाते हैं। अभी तक जान-माल का कोई नुक्सान नहीं हुआ है, लेकिन भालू अक्सर गन्ने और सब्जी की फसल को खराब कर देते हैं। ग्रामीण कभी भी भालुओं को नुक्सान नहीं पहुँचाते। जंगल कम होने की वजह से वहां फल-सब्जी नहीं मिलता जिस वजह से भालू गांव में भोजन की तलाश में आ जातें हैं। हम लोगो ने गांव में एक वन समिति बनाई है, जो ग्रामीणों को वन के पेड़ों की कटाई करने से रोकते हैं। हमारे गांव में अब जंगल नहीं है बस कुछ झाड़ियां ही बची हैं । संपर्क – 9424182008 (RM)
Posted on: Feb 25, 2021. Tags: CG KANKER NARAYANSINGH SAHU VANANCHAL SWARA
वनांचल स्वर : चार के बीजो को बेचकर हम लोग जीवन यापन करते है...
ग्राम-मोदे, थाना-कोरर, जिला-कांकेर (छत्तीसगढ़) से हेमबती नायक चार के बीज के बारे में बता रही हैं कि वे लोग सुबह-सुबह 4 बजे उठकर मड़िया का पेज बनाते हैं, पेज लेकर ही जंगल जाया करते हैं| जंगल में दिनभर चार का बीज इकठ्ठा करते हैं, शाम को घर पहुँचकर बीजों को भिगा देते हैं| चार को लगभग तीन-चार दिन भिगाने के बाद पानी से साफ़ करते हैं, उसके बाद चार को सुखाते हैं| बीज जब अच्छी तरह से सुख जाता है हम उसे बेचने ले जाते हैं| चार बेचकर जो पैसा मिलता है, उसी से जरूरत का सामान खरीदते हैं| इस समय चार के पेड़ बहुत कम बचे हैं, पेड़ो को लोग काट देते हैं या फिर फल-फूल को बंदर खा जाते हैं| इसलिए चार नही मिल पाता है| जंगल मे भालू भी हैं, वो दिन में जंगल में रहते हैं रात को गांव में आ जाते हैं| गांव में बेर के फल खाने और तालाब का पानी पीने आ जाते हैं, अभी तक भालुओं ने किसी भी इंसान को कोई नुकसान नही पहुंचाया है, इस जंगल में बन्दर, भालू और चीते जैसे जानवर पाए जाते हैं|
सम्पर्क:- 7587094923
Posted on: Feb 25, 2021. Tags: CG HEMBATI NAYAK KANKER VANANCHAL SWARA
वनांचल स्वर: जड़ी बूटी के बारे में बता रहें-
ग्राम-मोदे, ब्लॉक-भानुप्रतापपुर, जिला-कांकेर (छत्तीसगढ़) से वैद्यराज मनोज कुमार पटेल बताते हैं कि वह किस-किस जड़ी-बूटी का इस्तेमाल कर मरीजों का इलाज करते हैं। उनका परिवार यह काम पीढ़ी दर पीढ़ी करता आ रहा है। वह जनता के लाभ के लिए यह काम निःशुल्क कर रहे हैं। निमोनिया, चर्म रोग संबंधी घाव, खुजली जैसे छोटे-मोटे रोगों का इलाज में जंगल से जड़ी-बूटी लाकर करते हैं। व्यवसायीकरण और बाज़ारीकरण के कारण बहुत सी जड़ी बूटियां विलुप्त हो गयी हैं|
Posted on: Feb 22, 2021. Tags: KANKER CG MANOJ PATEL VANANCHAL SWARA
वनांचल स्वर: योनी रोग का घरेलू उपचार...
ग्राम-रनई, थाना-पटना, जिला-कोरिया (छत्तीसगढ़) से वैद्य केदारनाथ पटेल मानसिक रोग का घरेलू उपचार बता रहे हैं, योनी में छोटे-छोटे दाने हो जाते है खुजली हो जाती है, रोगी को बहुत पीड़ा होती, आम वृक्ष छाल का रस, 15-30 ग्राम बकरी के दूध के साथ 1 सप्ताह सेवन करने से लाभ हो सकता है|
2. अमलतास का बिज को जल के साथ पिस कर उपदंस के जख्मों पर लेप करने लाभ हो सकता है|
3. अर्ग के जड़ के छाल को छाया में सुखा कर बारीक चूर्ण बना ले, 5 ग्राम चूर्ण पानी के साथ सेवन करने से लाभ हो सकता है, संबंधित विषय पर जानकारी के लिये संपर्क कर सकते हैं| संपर्क नंबर@9826040015. (184949) GT
