बंधो रे बंधो रे सुमत के बाना तबे आही राज गोडवाना...बंधना गीत
ग्राम-देवरी, जिला-सूरजपुर, (छत्तीसगढ़) से कैलाश पोया एक बंधना गीत सुना रहे हैं:
बंधो रे बंधो रे सुमत के बाना-
तबे आही राज गोडवाना-
घर ले निकली कमर ला कास के-
राहब सीना ताना-
धरती मा रह के सेवा ला करबो-
धरती के करज है चुकाना...
Posted on: Feb 09, 2018. Tags: KAILASH SINGH POYA SONG VICTIMS REGISTER
Impact: Our broken waterpump got repaired 3 days after CGnet report, thanks...
ग्राम-देवरी, जिला-सूरजपुर (छत्तीसगढ़) से कैलाश सिंह पोया बता रहे है कि उनके गाँव के माजापारा में नवम्बर माह में नलकूप खराब हो गया था और डेढ़ दो महिना बीत गया था और आवेदन देते-देते थक गए थे लेकिन ब्लाक और पंचायत से लेकिन कोई ध्यान नही दे रहे थे और नलकूप नही बन रहा था तो उन्होंने सीजीनेट स्वर में एक संदेश रिकॉर्ड किये रिकॉर्ड करने के बाद सीजीनेट के साथियों ने अधिकारयो के ऊपर दबाव बनाया तो 3-4 दिन में नलकूप ठीक कर दिए और अभी बढ़िया चालू है इसलिए सीजीनेट सुनने वाले साथियों को जिन्होंने अधिकारियों को फोन कर के दबाव डाला और उन अधिकारियो को वे धन्यवाद दे रहे है जिन्होंने उनकी मदद की. कैलाश सिंह पोया@9753553881.
Posted on: Jan 17, 2018. Tags: KAILASH SINGH POYA SONG VICTIMS REGISTER
मशीन अब आ गए है गवाई में, गांव कर बहन भैया पड़ गए है नोट के कमाई में...कविता-
ग्राम-देवरी, पोस्ट-थाना, जिला-सूरजपुर (छत्तीसगढ़) से कैलाश सिंह पोया एक कविता सुना रहे है:
मशीन अब आ गए है गवाई में-
गाँव कर बहन भैया पड़ गए है-
नोट के कमाई में-
ये नोट कमाई में भैया-
करत है पुलाई-
एक दिना ये नोट हर-
आला मली जीवा ला लेके जाई-
पड़ गए है नोट के कमाई में...
Posted on: Dec 31, 2017. Tags: KAILASH SINGH POYA SONG VICTIMS REGISTER
माता पिता जनम देहिस धरती में ठहराईस...कविता -
नए वर्ष की शुभकामना के साथ ग्राम-देवरी, जिला-सूरजपुर (छत्तीसगढ़) से कैलाश सिंह पोया एक कविता सुना रहे हैं :
माता पिता जनम देहिस धरती में ठहराईस – ये धरती हर पालन करिस जीवन ला बचाईस – बैमान मुर्ख धरती ला बेचे समझ नही पाईस –
माता पिता सबो कर ये धरती हर इतिहास ला बताईस – सैतान बैमान ये धरती ला रकम बनाईस सोच नही पाईस...
Posted on: Dec 28, 2017. Tags: KAILASH SINGH POYA SONG VICTIMS REGISTER
नवा साल आवत है, बोकरा मुर्गी मन घबरावत है...कविता -
ग्राम-देवरी, जिला-सूरजपुर (छत्तीसगढ़) से कैलाश सिंह पोया नये साल के उपलक्ष्य में एक कविता सुना रहे है:
नवा साल आवत है-
बोकरा मुर्गी मन घबरावत है-
का होई हमार जीवन हर पानी-
भीतर मछली मन डरावत है-
नाचते गाते डीजे बजाते-
आउर दारु के नदियाँ बहाते-
देख के तमाशा ला-
मुश्वा गला घबरात है..
