ताड़-पत्ते की झोपड़ी बारिश के समय अंदर भीग जाती है। सरकारी आवास दिलाने में मदद करें।
गांव का करका कन्ना: सोडेल गुडा, पंचायत: डोंड्रा, जिला: सुकमा, राज्य: छत्तीसगढ़ का कहना है कि वे बहुत गरीब परिवार से हैं और उनका घर ताड़ के पत्तों का बना है. बरसात के दिनों में ज्यादातर झोपड़ियां अंदर से भीग जाती हैं। गांव के सरपंच को जिस सरकारी आवास के लिए आवेदन किया गया है, वह नहीं मिल रहा है। इसलिए वे सीजीनेट के सहयोगियों से अधिकारियों से बात करने और उन्हें घर दिलाने में मदद करने के लिए कह रहे हैं।
संपर्क नंबर :
9407933873
एसडीएम कुंता:7987206399.—————————————————————————————————————-
సంప్రదింపు నంబరు:
9407933873
SDM కుంట:7987206399.
Posted on: Nov 10, 2022. Tags: CG HOUSE KONTA PROBLEM SUKMA
प्रधानमंत्री आवास योजना नहीं मिला है, ताड का पत्ता से घर बनाकर रह रहे हैं, कृपया मदद करें
Posted on: Nov 07, 2022. Tags: CHATTISGARH HOUSE KONTA PROBLEM SUKMA
आप महजिद तोड़ते हो आप मडर से खत्म करते हो...कविता
के एम भाई, कानपुर उत्तर प्रदेश से एक कविता सुना रहे हैं:
आप महजिद तोड़ते हो आप मडर से खत्म करते हो
आप हमारे रतम रिवाजों को जिहात बोलते हो बेसक आप हमारे महजीद गिरा सकते हो लेकिन हमारे खुदा को नहीं गिरा सकते हो...
Posted on: Sep 21, 2022. Tags: BHAI KANPUR KM PEAM UP
बस्तर संभाग के सभी गाँव में इमली का पेड़ पाया जाता है, इनके गाँव में लगभग सभी के घर में इमली होता हैं-
ग्राम पंचायत- डोडरेपाल, जिला-बस्तर, ब्लाक-दरभा (छत्तीसगढ़) से सुक्मनी नाग जी बता रहे हैं, बस्तर जिले के सभी गाँव में इमली का पेड़ होता है| इनके गाँव में लगभग सभी के घर में इमली का पेड़ पाया जाता है| साधारण बीज वाली इमली को मार्केट में कम रेट 25-30 में ख़रीदा जाता है| जबकि बीज निकालकर बेचा गया इमली 75 रूपये किलो से ज्यादा पैसा मिलता है| बस्तर जिले में इमली वनोपज है| और इसे बेचकर लोग घर की जरूरतों का सामना खरीदते हैं| बस्तर में इमली की पेड़ व फल आसानी से पाया जाता है| संपर्क नंबर@9669868913.
Posted on: Jun 10, 2022. Tags: AGRICULTURE BASTAR CG DARBHA INFORMATION SUKMANI TAMARIND NAG
वक्त का ये परिंदा रुका है कहाँ...गीत
सुकमन सिद्धार, तरिया-जिला रायगढ़ से एक गीत सुन रहे हैं:
वक्त का ये परिंदा रुका है कहाँ,मैं था पागल जो उसको बुलाता रहा-
वक्त का ये परिंदा रुका है कहाँ,मैं था पागल जो उसको बुलाता रहा-
वक्त का ये परिंदा रुका है कहाँ-
चार पैसे कमाने मैं आया शहर ,गाँव मेरा मुझे याद आता रहा-
लौटता था मैं जब काट के दोपहर-
अपने हाथों से खाना खिलाती थी माँ...
