वनांचल स्वर: बुजुर्ग ने किया साहस प्रयोग के लिए दी ज़मीन-

ग्राम-दमकसा, जिला-कांकेर (छत्तीसगढ़) शेर सिंह आँचला जी ने बताया कि यह भूमि उनके लिए बहुत महत्वपूर्ण है उनके पूर्वज यहाँ 17वीं-18वीं शताब्दी के आस पास आए। ये अध्यापक थे। लोगो को जागरूक और वन बचाने के लिए संगठन बनाया और पंजीकरण भी करवाया । इसी को ध्यान रखते हुए अपनी जमीन पर एक प्रयोग किया नर्सरी बनवाकर, और कई तरह की विलुप्त होने वाली औषदियाँ भी लगाई। अब लोग जागरूक होने लगे हैं। गिलोय, भूलिम, आंवला के पेड़ लगाए गए। सुरक्षा का अभाव था, कार्यशालाएं भी चल रही हैं। हर वर्ष 5 जून को पर्यावरण दिवस भी मनाते हैं। जब तक लोगो में जागरूकता और सहयोग नही है तब तक कोई सफलता नही मिलेगी। मुझे प्रकृति पर्यावरण पर आस्था है। या फ़िनलैंड से विदेशी आए थे, अमेरिका से भी कुछ दिन पहले यहां आए थे, दिल्ली से भी आते रहते हैं। (MS)

Posted on: Apr 01, 2021. Tags: CG KANKER SHERSINGH ACHALA VANANCHAL SWARA

स्वास्थ्य स्वर : कोरिया पेड़ का औषधियों उपचार-

ग्राम-हिटारकसा, ब्लॉक-भानुप्रतापपुर, जिला-कांकेर (छत्तीसगढ़) से वीर सिंह पटेल औषधियों के बारे में बताते हैं। उबके हिसाब से कोरिया का पेड़ सर्वोत्तम औषधि है। इसको सर्दी, गर्मी खांसी जुखाम में इलाज के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है। नीम की छाल और पत्तों को भी अच्छी औषधि माना जाता है।

Posted on: Mar 24, 2021. Tags: CG HEALTH KANKER VEERSINGH PATEL

पर्व, विवाह और जीविका के लिये वनों का प्रयोग और उनका संरक्षण

धनेली कन्हार, उत्तर बस्तर कांकेर, छत्तीसगढ़ से विरेन्द्र कुमार मार्गीया बता रहे हैं, आदिवासी सामुदाय वनों से अपनी जीविका का साधन एकत्र करते थे| प्रकृति में जो फल होते हैं, जिसे सामुदाय उपयोग करता है उसके नाम पर एक पर्व मनाया जाता था, आज भी ये परम्परा देखने को मिलती है| विवाह के लिये निवासी जंगल से जामुन पेड़ की डाली, डूमर का फल का उपयोग करते हैं, मण्डप के लिये चार के पेड़ और महुआ के पेड़ का उपयोग करते हैं| पेड़ो के संरक्षण के लिये विवाह के समय इनके पौधे लगाये जाते हैं और उन्हें बड़ा करने तक उसकी देख रेख भी जाती है, जिससे पेड़ो का केवल दोहन न हो उनका संरक्षण भी हो|

Posted on: Mar 15, 2021. Tags: CG KANKER STORY VIRENDRA KUMAR

लाभ के लिये लोग वनो और पहाड़ो को नुकसान पहुचाने लगे हैं

ग्राम-दमकासा, जिला-कांकेर (छत्तीसगढ़) से निवासी शेर सिंह अचला हिन्दू बिनापाल के जगह के बारे मे बता रहे हैं, इससे पूर्व उसे गढ़ बिनपाल के नाम से जाना जाता था, उस जगह पर 3 पहाड़ियो का समूह है| अब लोग लाभ के लिये वनो की कटाई करने लगे हैं, खनिज संपदा जिसका लाभ बाहरी लोग लेना चाहते हैं| जिससे प्रकृति की सुरक्षा खतरे मे आती है| इससे जलवायु और मौसम मे असर पड़ रहा है| बिना मौसम बरिस, तेज गर्मी, अकाल होती है|

Posted on: Mar 12, 2021. Tags: BAHN SAHU CG KANKER STORY

समय के साथ जीवन शैली और पूजा पाठ बदलाव...

ग्राम-दमकासा, जिला-कांकेर (छत्तीसगढ़) से निवासी शेर सिंह अचला अपने समय होने वाले पूजा पाठ की प्रकृया, जीवन जीने के तरीके के बारे मे बता रहे हैं, उनका कहना है, पहले महुआ से जो शराब बनता था उसे औषधि के रूप मे उपयोग किया जाता था लेकिन समय के साथ उसका दुरुपयोग होने लगा और नसे के लिये उपयोग किया जाने लगा| वहाँ रहने वाले लोग पेड़, पहाड़ो मे आस्था रखते हैं| उनका कहना हैं पहले लोग पेड़ो प्रकृति की पूजा करते थे लेकिन बाद मे समय के साथ मंदिरो मे पूजा पाठ होने लगा|

Posted on: Mar 12, 2021. Tags: CG KANKER STORY

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