पहले हम लोग गोबर खाद का उपयोग करते थे लेकिन अब सरकारी खाद का उपयोग करते है (गोंडी)...

सीजीनेट जन पत्रकारिता यात्रा आज पंचायत-हनुमानपुर, जिला-कांकेर (छत्तीसगढ़) में पहुँची है वहां अमर मरावी गाँव के किसान पांडूराम कतलामी से वहां की धान की खेती के बारे में गोंडी भाषा में बात कर रहे है कि धान को कैसे लगाते है और कौन सा खाद का उपयोग करते है और कौन सा खाद का उपयोग नहीं करते है वे बता रहे है कि पहले के ज़माने में हम लोग गोबर खाद का उपयोग करते थे और उससे धान भी अच्छा होता था लेकिन अब सब लोग सरकारी या रासायनिक खाद का उपयोग करने लगे है तब से हम लोग भी रासायनिक खाद का उपयोग करने लगे है लेकिन यह नुकसानदायक है |पहले लोग 80-90 के उम्र में भी तंदरुस्त होते थे पर अब 60-70 में ही मृत्यु हो जाती है

Posted on: Sep 04, 2018. Tags: AGRICULTURE CG KANKER PANDURAM KATLAMI

वनांचल स्वर: पहले लोग कोदो, कुटकी खाते थे तंदरुस्त रहते थे, अब चावल खाकर कमज़ोर हो रहे हैं ...

ग्राम-पैयवारी, पंचायत-कढाई खुदरा, ब्लाक-अन्तागढ़, जिला-उत्तर बस्तर कांकेर (छत्तीसगढ़) से ग्रामीण दयाल सिंह और नरसू राम दुग्गा कृषि के बारे में बता रहे है कि, जैविक कृषि में हम लोग धान, कोदो, कुटकी, उड़द, कुल्थी का खेती करते है, जिससे हम अधिकतर लोग बेचने के लिए उगाते हैं, बेचने से जितना बचता है मुर्गियों को खिला देते हैं, जबकि ये स्वयं को खाना चाहिए, पूर्वज लोग कोदो कुटकी खाते थे और तन्दरूस्त रहते थे, हम लोग नही खा रहे हैं, हमारे अभी के लोगो में पहले के लोगों जैसा ताकत नही है, हमे भी कोदो कुटकी खाना चाहिए, जिससे शरीर में ताकत के साथ-साथ स्फूर्ति भी बना रहे, कोदो में अनेक प्रकार के बीमारियों से लड़ने की क्षमता होती है, इसलिए कोदो कुटकी लोगों को खाना चाहिए

Posted on: Sep 02, 2018. Tags: AGRICULTURE AMAR MARAVI ANTAGARH CG KANKER SONG VANANCHAL SWARA VICTIMS REGISTER

वनांचल स्वर: मक्के का पेज बनाकर पीने से गर्मी से राहत मिलती है, गाय के लिए भी बहुत उपयोगी...

ग्राम तोरखुडु, पंचायत-हनुमानपुर, जिला-कांकेर (छत्तीसगढ़) से पांडुराम कतलामी बता रहे हैं कि वो लोग मक्का की खेती किस प्रकार करते है और उसके उपयोग के बारे में भी बता रहे है: वे कह रहे हैं कि हम लोग मक्का उगाने के लिए सबसे पहले हल चलाते है उसके बाद मक्का के बीज को बो देते है | जब मक्का थोड़ा बड़ा हो जाता है तब हम मक्के के साथ जो घास उगता है उसको उखाड़ कर फेक देते है (निदाई करते है) जब मक्का खिल जाता है (फल जाता है)तब हम मक्का के पत्ती को काट कर गाय बैल को खिलाते है इससे गाय भैंस स्वस्थ रहता है और बहुत दूध देती है हम मक्का को भूंज कर भी खाते है और उसका पेज बनाकर पीते है जिससे गर्मी के मौसम में राहत मिलती है |

Posted on: Aug 27, 2018. Tags: CG HINDI KANKER PANDURAM KATLAMI AGRICULTURE SONG VANANCHAL SWARA VICTIMS REGISTER

किसान स्वर : हमारे गांव में 600 में से 50 लोग आज भी जैविक खाद का उपयोग कर खेती करते हैं-

ग्राम पंचायत-बेंदोरा, प्रखण्ड-चैनपुर, जिला-गुमला (झारखण्ड) से आदिवासी किसान विष्णु खैरवार, सहदेव नायक, अंसोलेम बाड़ा और देवलाल कुजूर मोहन यादव से बात कर रहे हैं, वे बता रहे हैं कि वे अपने वहां खेती में आषाढ़ के महीने में में फसलो की कई देसी किस्मो की बुआई करते हैं जिसमे ललाट धान, हीराफूल, जीराफूल, गोड़ा, मडुवा, मक्का, गेहूल, गोपालभोग, दहिया, छोटा दहिया, अरहर, बोका धान, कला मदानी, छोटा कला मदानी, बच्चा कला मदानी, जीली, करनी, डाँड़ जीनी, गेंदाबूल, गाड़िया धान, पुलकोभी, जबाफूल आदि शामिल हैं, उनके गांव में करीब 600 किसान हैं, जिसमे लगभग 50 किसान आज भी गोबर खाद का उपयोग खेती में करते हैं

Posted on: Jul 26, 2018. Tags: AGRICULTURE MOHAN YADAV SONG VICTIMS REGISTER VISHNU KHAIRWAR

हम लोग बरसात के समय धान की खेती के अलावा बदाम, मक्का, उड़द, बुंदली भी उगाते हैं...

ग्राम-सुग्गासर्वा, पंचायत-बरवेनगर, ब्लाक-चैनपुर, जिला-गुमला (झारखंड) से प्रभा एक्का खेती के बारे में बता रही हैं कि उनके गांव में मुख्यत: धान की खेती होती हैं और बरसात के समय धान की खेती के अलावा बदाम, मक्का, उड़द, मडुआ, बुन्द्ली की खेती होती है और कृषि क्षेत्र के विभागीय अधिकारी उन्हें प्रशिक्षण दे रहे है वे उसी तकनीकी से प्रयास कर रहें है कि फसल अधिक हो. वे कह रही हैं कि तकनीकी का उपयोग करेंगे तो उन लोगों को भारी मात्रा में उपज होगी जो बहुत लाभदायक होगा, दूसरे महीना में उनके गांव में पानी की कमी होता हैं उनके कारण अधिक मात्रा में फसल उत्पादन नही होती हैं पर जिसके पास सिंचाई का साधन है वे लोग टमाटर, आलू, बैंगन जैसे फसलों का उत्पादन करते हैं|

Posted on: Jul 21, 2018. Tags: AGRICULTURE GUMLA PRABHA EKKA SONG VICTIMS REGISTER

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