दुनिया में होवथ है गोहर,जय सेवा बड़ादेव हो...गोंडी धर्म गीत
ग्राम पंचायत-देवरी, ब्लाक-प्रतापपुर, जिला-सूरजपुर (छत्तीसगढ़) से कैलाश पोया एक बड़ादेव का सुमिरन गीत सुना रहा है:
दुनिया में होवथ है गोहर,जय सेवा बड़ादेव हो-
दुनिया में होवथ है गोहर,जय सेवा बड़ादेव हो-
मन में धरा,मन में धरा ओखर विचार-
दुनिया में होवथय गोहर,जय सेवा बड़ादेव हो-
मन मने सबे कोनो,धरा विचार-
जय सेवा नारा दुनिया म रे-
दुनिया में होवथय गोहर,जय सेवा बड़ादेव हो...
Posted on: Jun 22, 2018. Tags: KAILASH SINGH POYA SURAJPUR SONG VICTIMS REGISTER
जम मग ज्योति जले बूढ़ादेव के आरती होए...आरती गीत
ग्राम-देवरी, ब्लाक-प्रतापपुर, जिला सूरजपुर (छत्तीसगढ़) से कैलाश सिंह पोया एक बडादेव की आरती गीत सुना रहे है:
जम मग ज्योति जले बूढ़ादेव के आरती होए-
ज्योति जले हो भईया ज्योति जले-
कोने तो गहावे अउ कोने हर बजावे-
लिंगो तो गावे पारी कुपारी बजावे-
संग साथी आरती गावे बूढ़ादेव के आरती होए-
जम मग ज्योति जले बूढ़ादेव के आरती होए...
Posted on: Jun 20, 2018. Tags: KAILASH SINGH POYA SURAJPUR SONG VICTIMS REGISTER
गिर गए आषाढ़ हमन जंगल जाबो यार...वर्षा गीत
जिला-सूरजपुर (छत्तीसगढ़) से कैलाश सिंह पोया एक आषाढ़ गीत सुना रहे हैं:
गिर गए आषाढ़ हमन जंगल जाबो यार-
पुटू लोरब, कुकड़ी लोरब अउ लोरब सरुआ-
मिल जुल के संग सांथी जंगल ला घुमाब-
ऐदे गिरेहे आषाढ़ चला जंगल जाबो रे-
नवा नवा पुटू कुकड़ी जंगल मा मिलथे-
नवा-नवा सरु साग अच्छा वो ह लगथे जंगल मा जाबो-
देखे ला हरा भरा जंगल हमर करिया...
Posted on: Jun 18, 2018. Tags: KAILASH SINGH POYA SONG VICTIMS REGISTER
घोडा नाचे हाथी नाचे नाचे सोन चिरैया...बाल कविता
ग्राम-देवरी, पोस्ट-चंदोरा, ब्लाक-प्रतापपुर, जिला-सूरजपुर (छत्तीसगढ़) से कैलाश सिंह पोया एक बाल कविता सुना रहे है:
घोडा नाचे हाथी नाचे नाचे सोन चिरैया-
किलक-किलक बंदर नाचे-
बालू ताकुर तैय्या-
टुमुक-टुमुक खरहा नाचे-
ऊंट मेमना गया...
Posted on: Jun 07, 2018. Tags: KAILASH SINGH POYA SONG VICTIMS REGISTER
हे मनुष्य के कमाई में है मूस्टा मन मोटाई ये समुझी लेहियाँ भाई...कर्मा गीत-
ग्राम-देवरी, ब्लाक-प्रतापपुर, जिला-सूरजपुर (छत्तीसगढ़) से कैलाश पोया एक किसुन खेल कर्मा गीत सुना रहें हैं:
हे मनुष्य के कमाई में है मूस्टा मन मोटाई ये समुझी लेहियाँ भाई-
छोड्तहा पानी बरखा अउ छोड्तहा अस तस के कमाई समुझी लेहियाँ भाई-
छोड्तहा पानी बरखा अउ नहीं आई कइसे कइसे लईका ला जियाई-
धुमा-धुमा घाम करें बीमारी आई नहीं मिले पैसा रूपया कैसे ईलाज कराइ-
बोतल-बोतल दारू पिए दिन ला गवाई लईका बच्चा भूखे मरी जाई-
हे मनुष्य के कमाई मेहे मूस्टा मन मोटाई ये समुझी लेहियाँ भाई...
