वनांचल स्वर : पहले के लोग कोदो कुटकी खाकर ज्यादा दिन जीते थे, अब 50 साल भी नहीं जीते है...
ग्राम-जामकुटनी, पंचायत-बेलगाल, तहसील-पखांजूर, जिला कांकेर (छत्तीसगढ़) से सुरजू गोंडी में बता रहे है उनके क्षेत्र में पहले के लोग कोदो (कोहला) मड़या का इस्तेमाल करते थे तो ज्यादा बीमार नहीं पड़ते थे| पहले के लोग 75 साल तक जीते थे लेकिन अभी ऐसा नही है| अभी के लोग तो 50 साल में ही खत्म हो जाते हैं अभी के हर फसल में दवा का इस्तेमाल करते है| दवा वाले को खाने से अभी के लोग बहुत ज्यादा बीमार पड़ते है. पहले के लोग जंगलो में जाकर जंगल से मशरुम, बांस,भाजी आदि सब्जियों को ज्यादातर खाते थे|और उसी के अभी के आदिवासी जो है अपनी बोली भाषा को धीरे-धीरे भूल रहे है क्योंकि अभी थोडा बहुत पढ लिख लेते है तो जैसे 12 वी या कोलेज तो हिंदी, अंग्रेजी ज्यादा बोलने लगते हैं और देवी-देवताओ को भूल जाते है |
Posted on: Sep 11, 2018. Tags: AGRICULTURE AMAR MARAVI CG PAKHANJUR KANKER VANANCHAL SWARA
किसान स्वर : अधिक फसल के लिए रासायनिक खाद का उपयोग करते है, पर स्वास्थ्य के लिए बुरा...
ग्राम-मरोड़ा, तहसील-पखांजुर, ब्लाक-कोयलीबेडा, जिला-उत्तर बस्तर कांकेर, (छत्तीसगढ़) से विष्णु राम बता रहे है कि उनके क्षेत्र में सबसे ज्यादा खेती धान और मक्का का किया जाता है जिसमे रासायनिक खाद का उपयोग किया जाता है जो पैदावार बढ़ाती है लेकिन उससे नुक्सान होता है, जैविक खाद से उगाया हुआ अनाज स्वादिष्ट और ताकतवर होता है | पूर्वज लोग बिना रासायनिक खाद के ही फसल उगाते थे और लम्बे समय तक जीवित रहते थे, लेकिन आज रासायनिक खाद का उपयोग करके उगाया हुआ फसल में स्वाद नही होता है और उसमे पौष्टिक आहार भी नही होता है, इसलिए सबसे ज्यादा गोबर खाद का उपयोग करना चाहिए पर अधिक फसल के लिए हम लोग रासायनिक खाद का उपयोग कर रहे हैं
Posted on: Sep 09, 2018. Tags: AGRICULTURE AMAR MARAVI CG KANKER KISAN SWARA KOELIBEDA SONG VICTIMS REGISTER
किसान स्वर: सरकारी खाद से स्वास्थ्य अच्छा नहीं रहता है पर हम अभी उसका ही उपयोग करते हैं...
ग्राम-पालनदी, पंचायत-जनकपुर, तहसील-पखांजूर, ब्लाक-कोयलीबेडा, जिला-उत्तर बस्तर कांकेर (छत्तीसगढ़) से अमर मरावी के साथ में संतराम गावड़े, देवदास गावड़े और सुनीता गावडे बता रहे है कि उनके गाँव में धान की उपज अधिक होती है, वे सरकारी खाद का प्रयोग कर धान की खेती करते हैं, खेती के लिए पहले जुताई करते हैं, उसके बाद रोपाई का काम किया जाता है और खाद डालते हैं, पहले किसान गोबर खाद का प्रयोग खेती में करते थे, लेकिन उर्वरक शक्ति कम होने के कारण अब सरकारी रासायनिक खाद का उपयोग करने लगे हैं, पहले लोग गोबर खाद के प्रयोग से प्राप्त उपज का उपयोग करते थे, जो लोगो के स्वास्थ्य के लिए अच्छा था, लेकिन अभी रासायनिक खाद का प्रयोग करते हैं, जिसका स्वास्थ्य पर बुरा असर पड़ता है |
Posted on: Sep 09, 2018. Tags: AGRICULTURE AMAR MARAVI CG KANKER KISAN SWARA KOELIBEDA PAKHANJUR SONG VICTIMS REGISTER
किसान स्वर: जैविक खेती से स्वास्थ्य अच्छा रहता है पर हम सब रासायनिक खाद उपयोग करते हैं...
सीजीनेट जन पत्रकारिता यात्रा आज ग्राम-भुरभुसी, पंचायत-जबेली, पोस्ट-तेकामेटा, तहसील-पखांजूर, जिला-उत्तर बस्तर कांकेर (छत्तीसगढ़) पहुँची है वहां से अमर मरावी को गाँव के किसान रैनू राम कोला बता रहे हैं कि उनके गाँव (क्षेत्र) में सबसे अधिक धान की खेती करते हैं इस खेती की शुरुआत जुलाई महीने से होती है, इसमें वे समय-समय पर कम्पोस्ट खाद, डी.ए.पी. यूरिया, पोटाश आदि देते हैं| कीटनाशक 2-4-D का छिडकाव भी करते हैं, जिससे किसी भी तरह का कीट नही लगते हैं, यद्यपि इस क्षेत्र में अधिकतर किसान अभी रासायनिक खाद का उपयोग करते है पर वे कह रहे हैं कि जैविक खाद में अधिक पोषक तत्व होने के कारण इसे खाने में भी स्वाद और शरीर स्वास्थ्य को वह भोजन अधिक ताकत प्रदान करता है...
Posted on: Sep 04, 2018. Tags: AGRICULTURE CG KANKER KISAN SWARA PAKHANJUR RAINURAM KOLA SONG VICTIMS REGISTER
वनांचल स्वर : यहां महिला-पुरुष एक साथ मिलकर खेती का सब काम करते हैं, हल भी चलाते हैं...
ग्राम-मेकावाही, पंचायत-शंकरनगर, प्रखंड-कोयलीबेडा, जिला-उत्तर बस्तर कांकेर (छत्तीसगढ़) से अमर मरावी के साथ में आज गाँव की महिलाएं शांति, रमीता, प्रियंका और तुलसी बोगा हैं जो बता रहे हैं कि इस क्षेत्र में पुरुषों के साथ महिलाएं भी नागर फांदते हैं या हल चलाने का काम करती हैं, वे रोपा के समय में चिक्खल (जमीन रोपा लगाने योग्य जमीन बनाने) का काम भी करती हैं, सभी रोपा गाड़ने का काम भी करते हैं. घर में पुरुष होने के बाद भी महिलाएं जुताई करती हैं, वे प्रातः काल उठकर सभी तरह के काम झाड़ू लगाना, पानी भरना, खाना बनाना, उसके बाद हल चलाने और रोपा लगाने अपने-अपने खेतों में जाते हैं, ये सब, सभी महिला-पुरुष मिल जुलकर काम करते हैं |
