घने-घने वन कितने हैं, पर्वत कितने विशाल...कविता-
ग्राम-देवरी, पोस्ट+थाना-चंदोरा, तहसील+ब्लाक-प्रतापपुर, जिला-सूरजपुर (छत्तीसगढ़) से कैलाश पोया एक कविता सुना रहे है:
घने-घने वन कितने हैं, पर्वत कितने विशाल-
बड़ी बड़ी यहां नदिया है, बड़ी-बड़ी यहां का खदान-
यह अपने हैं, न बन जओं धनवान-
विध्याचल पर्वत माला सतपुड़ा है, सीना तान-
नर्मदा की बहती धारा गोद वर्धा के गाने-
संपदा अपनी है यही हमारी शान...
Posted on: Jul 15, 2018. Tags: KAILASH SINGH POYA KAVITA SONG VICTIMS REGISTER
जय सेवा मंत्र महान है जय सेवा मंत्र मंत्र महान है...गोंडवाना गीत
ग्राम-देवरी, ब्लॉक्-प्रतापपुर, जिला-सूरजपुर(छत्तीसगढ़) कैलाश सिंह पाया जय सेवा गोंडवाना मंत्र सुना रहे है:
जय सेवा मंत्र महान है जय सेवा मंत्र मंत्र महान है-
गोंडवाना की पहचान है गोंडवाना की पहचान है-
गोंडवाना के जवानो गोंडवाना के जवानो-
तुम अपने को पहचानो-
ना बने रहो तुम नादान जय सेवा मंत्र महान...
Posted on: Jul 11, 2018. Tags: KAILASH SINGH POYA SONG VICTIMS REGISTER
हायरे हाय मैना प्रतापपुर बजारे जाबो...जश्पुरिया कर्मा गीत
ग्राम-देवरी, पोस्ट+थाना-चन्दौरा, ब्लाक-प्रतापपुर, जिला-सूरजपुर (छत्तीसगढ़) से कैलाश सिंह पोया एक परम्परा जशपुरिया करमा गीत सुना रहे है:
हायरे हाय मैना प्रतापपुर बजारे जाबों-
कोने खरीदे करू तेल लेले प्रतापपुर बजारे जाबों-
कोने खरीदे भईया आतर गुलाब तेल-
कोने खरीदे करू तेल लेले प्रतापपुर बजारे जाबों-
छवडा रे खरीदे भईया आतर गुलाब तेल-
हायरे हाय मैना प्रतापपुर बजारे जाबों...
Posted on: Jul 11, 2018. Tags: KAILASH SINGH POYA SONG VICTIMS REGISTER
हायरे जंगल हर लागे तो सुहावन...कर्मा गीत
ग्राम-देवरी, थाना-चन्दौरा, ब्लाक-प्रतापपुर, जिला-सूरजपुर (छत्तीसगढ़) से कैलाश सिंह पोया एक गीत सुना रहे हैं:
हायरे जंगल हर लागे तो सुहावन-
पुटू खुखड़ी सब तो उठावे रे-
सच ला कहे रे लबारी दगा देहे रे-
कोन हर पुटू लोर कोन हर खुखड़ी-
कोने हर लोर सारु साग जंगल हर सुहावन लागे-
हवा पानी सुघरे भेटावे जंगल हर सुहावन लागे...
Posted on: Jul 09, 2018. Tags: KAILASH SINGH POYA KARMA SONG SONG VICTIMS REGISTER
ओह रे हो मर डघम डईया...कर्मा गीत
ग्राम-देवरी, जिला-सूरजपुर (छत्तीसगढ़) से कैलाश सिंह पोया एक कर्मा गीत सुना रहे है:
ओह रे हो मर डघम डईया-
कोन सावर गोदना गोदावे हो-
ओ केला कहे रे लबारी दगा देहे-
काहे के सुई काजर काहे के सावरिया-
काहे के गोदना गोदावे रे मर डघम डईया-
लोहे के सुई ये काजर लागे झाइनी-
ओह रे हो मर डघम डईया...
