एक दूसरे का मदद करने से जीवन सरल हो जाता है...कहानी-
गंगा किनारे एक अंधा और एक गूंगा रहते थे| एक देख नहीं सकता था| दूसरा बोल नहीं सकता था| दोनों एक दूसरे की मदद कर साथ जीवन व्यतीत करते थे| गूंगा अंधे को राह दिखता था| अंधा द्वार-द्वार पर आवाज लगाकर भीख मांगता था| इस तरह से दोनों झोली लेकर भीख मांगते थे| लोग उनको भिक्षा देते थे | दोनों का घर नहीं था| वे प्रसाद खाकर मंदिर में ही पड़े रहते थे| साथ ही वे मंदिर की साफ़ सफाई भी कर लेते थे| इस तरह से उनका जीवन गुजर रहा था| उनकी बेबसी ने उन्हें संत बना दिया|
Posted on: Mar 25, 2019. Tags: CG KANHAIYALAL PADIYARI RAIGARH SONG STORY VICTIMS REGISTER
ये जिनगी के नई आय ठिकाना गा संगी...गीत-
ग्राम-तमनार, जिला-रायगढ़ (छत्तीसगढ़) से कन्हैयालाल पड़ियारी एक गीत सुना रहे हैं:
ये जिनगी के नई आय ठिकाना गा संगी-
आनी बानी के रोग आगे-
मुश्किल होगे जीना गा संगी-
ठौर-ठौर मा खुलगे कारखाना-
किसिम किसिम के कल कारखाना गा संगी-
पर्यावरण ला दूषित करथे, नई आये कोखरो ठिकाना...
Posted on: Mar 25, 2019. Tags: CG KANHAIYALAL PADIYARI RAIGARH SONG VICTIMS REGISTER
कदम-कदम बढ़ाये जा, खुशी के गीत गाये जा...देश भक्ति गीत-
ग्राम-बटई, पोस्ट-रेवटी, विकासखण्ड-प्रतापपुर, जिला-सूरजपुर (छत्तीसगढ़) से दुर्गेश पटेल एक देश भक्ति गीत सुना रहे हैं :
कदम-कदम बढ़ाये जा, खुशी के गीत गाये जा-
ये जिन्दगी है क़ौम की, तू क़ौम पे लुटाये जा-
तू शेर-ए-हिन्द आगे बढ़, मरने से तू कभी ना डर-
उड़ा के दुश्मनों का सर, जोश-ए-वतन बढ़ाये जा-
कदम-कदम बढ़ाये जा-
तेरी हिम्मत बढ़ती रहे, खुदा तेरी सुनता रहे...
Posted on: Mar 25, 2019. Tags: CG DURGESH PATEL PRATAPPUR SONG SURAJPUR VICTIMS REGISTER
देख मोर संगी रे, तोर बिन मै होवथों बेहाल...गीत-
ग्राम-कोटया, जिला-सरगुजा (छत्तीसगढ़) से मेवालाल देवांगन एक गीत सुना रहे हैं :
देख मोर संगी रे, तोर बिन मै होवथों बेहाल-
बासी ला खाथो आंगियासी लागे हो-
तोर सुरता करतहो मै जोड़ी, रोवासी लागे हो-
देख मोर संगी रे, तोर बिन मै होवथों बेहाल-
बासी ला खाथो आंगियासी लागे हो-
तोर सुरता करतहो मै जोड़ी, रोवासी लागे हो...
Posted on: Mar 25, 2019. Tags: CG MEVALAL DEVANGAN SONG SURGUJA VICTIMS REGISTER
संगवारी रे कैसे बचाबो परान, जंगल के बिना पानी नई बरसही...गीत-
ग्राम-छुलकारी, जिला-अनूपपुर (मध्यप्रदेश) से कन्हैयालाल केवट एक गीत सुना रहे हैं:
संगवारी रे कैसे बचाबो परान-
जंगल के बिना पानी नई बरसही-
जंगल नई रही ता पानी नई आही-
कहां पाबो कुटकी धान रे भईया-
कईसे बचाबो परान-
जंगल में मिलही पूटू अउ पिहरी-
सब्जी गजब मिठाथे गा भईया...
