IMPACT: नदी का गंदा पानी पीना पड़ता था, गांव में पानी का सुविधा हो गया....
रमैया जी ग्राम दुदकपाली पंचायत दुदकपाली,मंडल भोपालपली,जिला भोलपली,तेलंगाना से बता रहे हैं इनके गॉव में पानी पिने का कोई सुविधा नहीं था| वे जंगल में नाले से पानी लाकर पीते थे| पानी गन्दा रहता है फिर भी उसी पानी को पीना पड़ता था, सरपंच के माध्यम से बोर लगाना चाहते हैं लेकिन फारेस्ट मना कर रहे थे,हमारे गांव में बोर लगाने में मदद किये| इसलिए सीजीनेट के साथियों को धन्यवाद दे रहे हैं: संपर्क ब्यक्ति 6305615491.
Posted on: Oct 22, 2022. Tags: BHOPALPALLI BULTOO IMPACT RADIO TG VALASA WATER
IMPACT: सीजीनेट में सन्देश रिकॉर्ड किया फिर कुछ दिन के बाद समस्या का समाधान हो गया
ग्राम तेरेपाड़ पंचायत चिंतूर,मंडल चिंतूर,जिला एल्लुरुसीतारामराजू आन्ध्र प्रदेश से मीडियम गंगा जी बता रहे है, उनके गाँव में एक पानी टंकी लगा था| जो ख़राब हो गया था, ये पानी टंकी किसी संस्था के सहयोग से लगाया गया था| क्योकि गाँव वालो को पानी पिने में दिक्कत होता था, वे लोग छतीसगढ़ से आये है और जंगल में घर बना कर रहते है, जब से पानी टंकी ख़राब हुवा था तब से वे लोग को पानी पिने में परेशानी हो रहा था, फिर उन्होनें सीजीनेट में सन्देश रिकॉर्ड किया फिर कुछ दिन के बाद समस्या का समाधान हो गया इसलिए सीजीनेट के साथियों को धन्यवाद दे रहे हैं| सरपंच@9491594107 संपर्क ब्यक्ति @8500697478
Posted on: Oct 22, 2022. Tags: ALLURUSITARAMRAJU AP BULTOO CHINTOOR IMPACT RADIO VALASA WATER
खूब समझ कर कहना सुनना...गीत
सपना कुमारी एक गीत सुना रही हैं:
पढना बढ़ना लिखना गाना-
खूब समझ कर कहना सुनना-
कोई तुमको कागज देवें-
समझ बूझ कर हस्ताक्षर करना-
दूजे की बात में मत आना-
अपने मन की कलम पकड़ना जीवन की किताब को पढना...
Posted on: Oct 21, 2022. Tags: SAPNA KUMARI SONG
तुही मेरी आशकी है तू मेरी जिन्दगी हैं...गीत
पोम्मा कुमार त्रिपाठी, ग्राम पंचायत-धनपुर, जिला-कानपुर, बिहार से एक गीत सुना रहे हैं:
तुही मेरी आशकी है तू मेरी जिन्दगी हैं-
तुही मेरी हर खुसी हैं तुही प्यार तुही-
चाहत तुही मेरी आशकी है तू मेरी जिन्दगी हैं-
तुही पहली मोहोब्बत का एसाह हैं बुझ के बुझ न पायी...
Posted on: Oct 21, 2022. Tags: BIHAR HINDI KANPUR SONG
कोहे का ठंड जले पीपल के छाव रे..सादरी गीत-
सुरेन्द्र पाल ग्राम-मवई, जिला-बाँदा (उत्तरप्रदेश) से एक सादरी सुना रहे है:
कोहे का ठंड जले पीपल के छाव रे-
रुक जाओ परदेशी आज मेरे गांव में-
डोल रही पीपल पत्ती गोल गोल रे-
कोहे का ठंड जले पीपल के छाव रे-
मन के मडइया स्वागत में मड रे-
कोहे का ठंड जले पीपल के छाव रे...
