वनांचल स्वर: आदिवासियों के बीच कुसुम का वित्तीय महत्व...

ग्राम-चाहचढ, तहसील-भानुप्रतापुर, जिला-कांकेर (छतीसगढ़), से लच्छूराम सलाम कुसुम का पेड़ के बारे में जानकारी दे रहे हैं| कुसुम का पेड़ को साल में दो बार छ:-छ: माह के अंतराल पर उगाया जाता है| छ: महीने में तैयार हो जाने पर काटते हैं| बाज़ार में इसकी कीमत 420 रुपया प्रति किलो है| समय के साथ दाम भी बढ़ता है| गाँव में हर आदमी लगभग 15 पेड़ उगाते हैं, वनवासी अपने ही पेड़ों को काटते हैं| 2-3 क्विंटल का उत्पादन होता है|
संपर्क@7647070617. (185559) GT

Posted on: Jan 09, 2021. Tags: CG KANKER LACHHURAM SALAM VANANCHAL SWARA

स्वास्थ्य स्वर : मोटापे की समस्या से निजात पाने का घरेलू नुस्खा-

जिला-टीकमगढ़ (मध्यप्रदेश) से वैद्य राघवेंद्र सिंह राय मोटापे की समस्या से निजात पाने का घरेलू नुस्खा बता रहे हैं| मेथी के दाने का चूर्ण बना लें| एक चम्मच का तीसरा भाग के बराबर चूर्ण लेकर सुबह शाम भोजन के बाद सेवन करें और पानी पियें| इससे लाभ हो सकता है| संबंधित विषय पर जानकारी के लिये संपर्क कर सकते हैं| संपर्क नंबर@9519520931. (AR)

Posted on: Jan 06, 2021. Tags: SONG SWASTHYA SWARA VICTIMS REGISTER

स्वास्थ्य स्वर : दुबलेपन की समस्या को दूर करने का घरेलू नुस्खा-

जिला-टीकमगढ़ (मध्यप्रदेश) से वैद्य राघवेंद्र सिंह राय दुबलेपन की समस्या को दूर करने का घरेलू नुस्खा बता रहे हैं| सतावर की जड़ का चूर्ण आधा चम्मच और मिश्री आधा चम्मच लेकर गुनगुने दूध में शहद मिलाकर सेवन करना है, इससे लाभ हो सकता है| संबंधित विषय पर जानकारी के लिये संपर्क कर सकते हैं| संपर्क नंबर@9519520931. (AR)

Posted on: Jan 06, 2021. Tags: SONG SWASTHYA SWARA VICTIMS REGISTER

स्वास्थ्य स्वर : मासिक धर्म की अनिमितता को ठीक करने का घरेलू नुस्खा-

ग्राम-रनई, थाना-पटना, जिला-कोरिया (छत्तीसगढ़) से वैद्य केदारनाथ पटेल मासिक धर्म की अनिमितता को ठीक करने का घरेलू उपचार बता रहे हैं, सुनकर नुस्खा उपयोग कर सकते हैं| संबंधित विषय पर जानकारी के लिये दिये नंबर पर संपर्क कर सकते हैं : संपर्क नंबर@9826040015. (AR)

Posted on: Jan 05, 2021. Tags: SONG SWASTHYA SWAR VICTIMS REGISTER

वनांचल स्व: त्योहारो पर वन की भूमिका...

ग्राम-धनेली कन्हार, तहसील-भानुप्रतापपुर, जिला-कांकेर (छत्तीसगढ़) ग्राम पटेल सुन्दर नरेटी बताते हैं कि वो नयी फसल खाने से पहले देवी देवताओं को चावल, दूध और शक्कर से अच्छा पकवान बनाकर चढ़ातें हैं, फिर उसके बाद ही वो खाते हैं। साजा के पेड़ को अपना इष्टदेव मानकर उस पर महुआ चढातें हैं। सभी आदिवासी मिलकर पूजा अर्चना भी करते हैं, उसके बाद सभी आदिवासी उसको खातें हैं। हरियाली पर भेलवा का पत्ता खेत में चढातें हैं माना जाता है कि भेलवा बहुत उपकारी होता है। कहीं कहीं पर भेलवा कि जगह नीम चढ़ाया जाता है। आज से 30-35 वर्ष पहले जंगल से बांस लाकर उसकी गेड़ी बनाकर 2 किलोमीटर दूर तक जाकर खेलते थे। दीपावली पर खेत से ढाल लाकर घर के आंगन में सजाते हैं। वन से पत्ता लाकर उसकी माला बनाकर जानवरो को पहनाते थे।(RM)

Posted on: Jan 02, 2021. Tags: CG KANKER SUNDAR NARETI VANANCHAL SWARA

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