वनांचल स्वर : यहां महिला-पुरुष एक साथ मिलकर खेती का सब काम करते हैं, हल भी चलाते हैं...
ग्राम-मेकावाही, पंचायत-शंकरनगर, प्रखंड-कोयलीबेडा, जिला-उत्तर बस्तर कांकेर (छत्तीसगढ़) से अमर मरावी के साथ में आज गाँव की महिलाएं शांति, रमीता, प्रियंका और तुलसी बोगा हैं जो बता रहे हैं कि इस क्षेत्र में पुरुषों के साथ महिलाएं भी नागर फांदते हैं या हल चलाने का काम करती हैं, वे रोपा के समय में चिक्खल (जमीन रोपा लगाने योग्य जमीन बनाने) का काम भी करती हैं, सभी रोपा गाड़ने का काम भी करते हैं. घर में पुरुष होने के बाद भी महिलाएं जुताई करती हैं, वे प्रातः काल उठकर सभी तरह के काम झाड़ू लगाना, पानी भरना, खाना बनाना, उसके बाद हल चलाने और रोपा लगाने अपने-अपने खेतों में जाते हैं, ये सब, सभी महिला-पुरुष मिल जुलकर काम करते हैं |
Posted on: Sep 04, 2018. Tags: AGRICULTURE AMAR MARAVI CG KANKER KOYLIBEDA SONG VANANCHAL SWARA VICTIMS REGISTER
पोसे कीले टीराल तिनताये टीनोये...गोंडी गीत
ग्राम-मेहेडा, जिला-उत्तर बस्तर कांकेर (छत्तीसगढ़) से नीला उसेंडी गोंडी भाषा में एक गीत सुना रही हैं:
रे रे लोयो रेला रेला रे रे ला रे रेला-
पोसे कीले टीराल तिनताये टीनोये-
दादान बाटा अगे वाता मनताये मनो-
तमोन बाटा कोड़ायार वाता मनताये मनोये-
तमोन बाटा कोड़ायार वाता अंग्रेजी वडाकायता-
रे रे लोयो रेला रेला रे रे लो रे रे ला-
ओरा बोरा मरमा येलो मरमा रोय येलो...
Posted on: Sep 04, 2018. Tags: CG GONDI KANKER NEELA USENDI SONG
पुनरपि जन्म पुनरपि मरणम, ये काया विनाशनम...जीवन कथा
ग्राम-तमनार, जिला-रायगढ़ (छत्तीसगढ़) से कन्हैयालाल पडियारी एक हकीकत कथा सुना रहे हैं: पुनरपि जन्म पुनरपि मरणम, ये काया विनाशनम: जैसे सृष्टि में चार ऋतु होते हैं शरद, बसंत, ग्रीष्म, वर्षा, ठीक उसी प्रकार जीवों की भी चार अवस्था होती है, बचपन, लड़कपन, जवानी, बुढ़ापा, लेकिन ये चक्र तब तक चलती है जब तक सृष्टि है.मनुष्य और जीव जंतु की आयु सीमा समाप्त हो जाती है और वह एक दिन मृत्यु को प्राप्त हो जाती है यहां जो भी जीव आता है ये शरीर छोड़कर जीवात्मा उड़ जाता है| जितना दिन भटकने का रहता है उतना दिन भटकने के बाद पुनः इस धरती में जन्म लेता है और कर्म के अनुसार दुःख-सुख को काटने के बाद पुनः उन्ही चार अवस्था में वापस हो जाता है...
कन्हैयालाल पडियारी@9981622548.
Posted on: Sep 04, 2018. Tags: CG KANHAIYALAL PADIYARI RAIGARH SONG VICTIMS REGISTER
पहले हम लोग गोबर खाद का उपयोग करते थे लेकिन अब सरकारी खाद का उपयोग करते है (गोंडी)...
सीजीनेट जन पत्रकारिता यात्रा आज पंचायत-हनुमानपुर, जिला-कांकेर (छत्तीसगढ़) में पहुँची है वहां अमर मरावी गाँव के किसान पांडूराम कतलामी से वहां की धान की खेती के बारे में गोंडी भाषा में बात कर रहे है कि धान को कैसे लगाते है और कौन सा खाद का उपयोग करते है और कौन सा खाद का उपयोग नहीं करते है वे बता रहे है कि पहले के ज़माने में हम लोग गोबर खाद का उपयोग करते थे और उससे धान भी अच्छा होता था लेकिन अब सब लोग सरकारी या रासायनिक खाद का उपयोग करने लगे है तब से हम लोग भी रासायनिक खाद का उपयोग करने लगे है लेकिन यह नुकसानदायक है |पहले लोग 80-90 के उम्र में भी तंदरुस्त होते थे पर अब 60-70 में ही मृत्यु हो जाती है
Posted on: Sep 04, 2018. Tags: AGRICULTURE CG KANKER PANDURAM KATLAMI
कौन पारा बुले जाय कौन पारा दिन ला गंवाए...सरगुजिया गीत
ग्राम-कोट्या, जिला-सरगुजा (छत्तीसगढ़) से मेवालाल देवांगन एक सरगुजिया गीत सुना रहे हैं :
बिना झोले नई जाओं, बिना झोले नई जाओं रे-
तोर ले तोर दीदी रिझवारे-
कोन पारा बुले जाय कोन पारा दिन ला गंवाए-
कोन पारा अरीछा-मरीछा कोन पारा खाए बीरा पान ला...
