हय रे पीया यहा बैमान खुदसी-खुदसी जिव ला ले...सरगुजिया फागुन गीत
ग्राम पंचायत-बेकारीडांड, विकासखंड-ओड्गी, जिला-सुरजपुर, (छत्तीसगढ़ी) से गणेश सिंह आयाम सरगुजिया भाषा में एक फागुन गीत सुना रहे हैं:
नही तो लिखे नही पढे ये नही कलम धरे-
कलम धरत मोके लाज लागे-
काला लिख के दिखांव खुदसी-खुदसी जिव ला ले-
हय रे पीया यहा बैमान खुदसी-खुदसी जिव ला ले-
नही तो लिखे नही पाढे ये नही कलम चलाय-
कलम चलते मोला लाज लागे...
Posted on: Sep 17, 2018. Tags: CG FAGUN GANESH SINGH AYAM ODGI SARGUJIHA SONG SURAJPUR VICTIMS REGISTER
ओरा बोरा मरमा येलो ले ओरा बोरा मरमा रोय...गोंडी विवाह गीत
आश्रित ग्राम-मुरावंडी, तहसील-पखांजूर, जिला-उत्तर बस्तर कांकेर (छतीसगढ़) से राधा कचलाम के साथ सुजान बाई, रजोला बाई और समरी एक गोंडी विवाह गीत सुना रहे है:
रे रे लोयो रेला रे रे ला रे रे ला रे रेला-
से से रूम जूम रेला रे रे ला-
ओरा बोरा मरमा येलो ले-
ओरा बोरा मरमा रोय-
से से रूम जूम रेला रे रे ला-
जाति मंडाव पेकोर येलो ले-
जाति मंडाव पेकोर रोय-
ओरा इसे मरमा येलो ले-
ओरा इसे मरमा रोय-
से से रूम जूम-
नेडे मरमा आयार येलो ले-
नेडे मरमा आयार रोय-
से से रूम जूम-
रे रे लोयो रेला रे रे ला-
रेला रे रे ला...
Posted on: Sep 17, 2018. Tags: CG GONDI KANKER MARRIAGE PAKHANJUR RADHA KACHLAM SONG
बकरी चराने वाले समारू और मंगलू उरांव की छत्तीसगढ़ी कहानी...
ग्राम-तमनार, जिला-रायगढ़ (छत्तीसगढ़) से कन्हैयालाल पडियारी एक कहानी सुना रहे हैं: चिर्रू नाम का एक उरांव रहता था, उसके दो बेटे थे जिसका नाम समारू और मंगलू जिसमे सम्हारु बहुत होशियार था, मंगलू होशियार नही था, चिर्रू खतम हो गया और उसके पत्नी वृद्ध हो गई घर के सभी जिम्मेदारी दोनों भाई के ऊपर आ गया| वे दोनों गाँव के बकरी चाराने लगे एक दिन समारू, मगलू से कहा जा रे बकरियों को चारा-चराकर ले आओ, वह थोड़ा चना रखा और चला गया मंझनिया के समय बकरियों को पानी पिला के और महुआ के छाया में सो गया, बकरी बैठ के चारा को पागुर ले रहे थे मंगलू अपने मन में विचार किया, ये बकरी मुझे लड़ने को कह रहे हैं, ये सोचकर जंगली पासा में सभी बकरियों के मार दिया सभी बकरी मर गये, और वे घर वापस अ गया समारू, मंगलू से पूछा बकरियाँ कहाँ हैं, बताया वो मुझे लड़ने के लिए चगली कर रहे थे तो मै उन्हें पासा से मार दिया, फिर मंगलू सोचा कि बकरी हमें नही छोड़ते और वह जाके सभी बकरी को भुदरा में ले जाके छुपा दिया और बकरियों के मालिकों को कह दिया सभी बकरियों को (बिग्वा) चीता खा गया, सभी लोग अपने-अपने बकरियों को खोजने गये, लेकिन एक भी नही पाए सभी मालिक चुपचाप रह गये, अर्थात ये कि व्यक्ति को हमेशा होशियार रहना चाहिए:
Posted on: Sep 17, 2018. Tags: CG CHHATTISGARHI KANHAIYALAL PADIYARI RAIGARH SONG STORY VICTIMS REGISTER
वनांचल स्वर: जंगलो से हमे सब्जी भाजी, शुद्ध हवा मिलती है, हमे जंगलो की रक्षा करनी चाहिए...
ग्राम-घोड़ागाँव, जिला-उत्तर बस्तर कांकेर (छत्तीसगढ़) से अमर मरावी के साथ मंगल पोटाई, सनद नुरुटी और लालासु नुरुटी जंगलो के बारे में गोंडी में बता रहे है कि हम जंगल के बिना नही रह सकते क्योंकि हम लोग जंगल से जुड़े हुये हैं जंगलो से हमे बहुत कुछ सब्जी भाजी मिलती है तो हम सब को मिलकर जंगल को बचाना चाहिए और हमें इसे आगे आने वाली पीढ़ी के लिए बचाना होगा यदि जंगल उजड़ जायेगा तो हम नही रह सकेंगे।जंगल नही रहने से हमारा बहुत नुकसान होगा | जंगल होने से हमे बहुत फायदा होता जंगल से हमे बांस लकड़ी सब कुछ मिल जाता हैं जंगल रहने से हमे शुद्ध हवा मिलता है यदि जंगल नही होता तो हमे ये सभी चीजे मिल पाना संभव नहीं होता|
Posted on: Sep 17, 2018. Tags: AMAR MARAVI CG FOREST GONDI KANKER
विरल-विरल तुरी उमर चितोरी...गोंडी बाल गीत
ग्राम-पंचायत-बड़ेबेटिया, विकासखंड-कोयलीबेडा, जिला-उत्तर बस्तर कांकेर (छत्तीसगढ़) से स्कूल की कक्षा 3 की छात्रा कुमारी लिलिमा उसेंडी एक गोंडी गीत सुना रही हैं:
विरल-विरल तुरी उमर चितोरी-
तनी उम्र मार-मार चल चितोरी-
बेंड बाजा मोके पडला मू-
ओ बेंड बाजा-
विरल-विरल तुरी उमर चितोरी-
बेंड बाजा मोके पडला मू-
तनी उम्र मार -मार चल चितोरी...
