रुचा रुचा रे साथी बोले, मंदरु पहारे बसा काटे...गीत-
ग्राम-धुमाडांड, पोस्ट-गोविंदपुर, थाना-चंदोरा, ब्लाक-प्रतापपुर, जिला-सूरजपुर (छत्तीसगढ़) से शिव बालक सिंह श्यामले एक कर्मा गीत सुना रहे हैं:
रुचा रुचा रे साथी बोले-
मंदरु पहारे बसा काटे-
रुचा रुचा रे साथी बोले-
कोंदू पहारे बासा काटे...
Posted on: Mar 04, 2019. Tags: CG PRATAPPUR SHIVBALAK SINGH SHYAMALE SONG SURAJPUR VICTIMS REGISTER
ग्राम पंचायत, बढ़ावनडाड के ग्रामीण ५ किलोमीटर दूर से पिने का पानी लाने को मजबूर...
ग्राम पंचायत-बढ़ावनडाड,जिला-बिलासपुर (छत्तीसगढ़) से सुखसागर सिंह ग्रामीणों से चर्चा कर रहे मौजूद महिलाऐ पीने के पानी की समस्या बता रही है सुमिंत्रा बाई, कौशल्या बाई और विद्या बाई जो बता रही हैं कि यहां पानी की बहुत समस्या है, 20 परिवार यहाँ रहते है लोगो को पीने के पानी के लिए 5 किलो मीटर दूर जाना पड़ता है नहाने के लिए भी पानी की कोई अच्छी सुविधा नहीं है, इस समस्या के लिए आवेदन भी किया है लेकीन कोई सुनवाई नहीं हुई है, इसलिए सीजीनेट के सभी साथियों से निवेदन है की इन नम्बरों पर फ़ोन कर दबाव बनाये जिससे पानी की समस्या का समाधान किया जा सके...
सरपंच@8120755680,पी.एच.ई.@9993485805. सुखसागर@9669383380
Posted on: Feb 28, 2019. Tags: SONG SUKHSAGAR SINGH PAVLE VICTIMS REGISTER
जंगला खोजों की, झाड़ी ला खोजो, खोजो शिवा बाबा ला...शिव भक्ति गीत
ग्राम-मांजापुर, थाना-रमनुजनगर, जिला-सुरजपुर, (छत्तीसगढ़) से रामबाई सिंह एक शिव भक्ति गीत सुना रही है :
जंगला खोजों की, झाड़ी ला खोजो, खोजो शिवा बाबा ला-
कैसे बनाया भोला माटी का, ये चोला ला-
जंगला खोजों की, झाड़ी ला खोजो, खोजो नीलम दीदी ला-
कैसे बनाया भोला माटी का, ये चोला ला-
जंगला खोजों की, झाड़ी ला खोजो, खोजो माता,पिता ला-
कैसे बनाया भोला माटी का, ये चोला ला...
Posted on: Feb 27, 2019. Tags: RAMBAI SINGH SONG VICTIMS REGISTER
पीलो रे भाई पीलो...चायपत्ती गीत
ग्राम-सिहपुर कवीरधाम, जिला-कवर्धा (छत्तीसगढ़) से हेमसिंह मरकाम
एक गीत सुना रहे हैं :-
पी लो रे भाई पी लो – जीवा के चायपत्ती ला पिलो-
एक नंबर के स्वाद है एमा – गैस्टिक फ्री तंदरुस्ती बारे है...
Posted on: Feb 27, 2019. Tags: HEMSINGH MARKAM SONG VICTIMS REGISTER
झाड़ू जब तक एक सूत्र में बंधा रहता है, तब तक कचरा साफ करता है...कविता -
ग्राम-देवरी, जिला-सूरजपुर (छत्तीसगढ़) से कैलाश सिंह एक कविता सुना रहे है:
झाड़ू जब तक एक सूत्र में बंधा रहता है-
तब तक कचरा साफ करता है-
लेकिन वही झाड़ू बिखर जाती है-
तो खुद कचरा बन जाती है-
इसलिए हमेशा संघटन में बंधे रहे-
बिखर कर कचरा न बने...
