वनांचल स्वर:वनवासी और उनके देवता

ग्राम-धनेली कनार, तहसील-भानुप्रतापपुर, जिला-कांकेर (छत्तीसगढ़) व्यास साहू बताते हैं कि बस्तर आदिवासी क्षेत्र में वनवासी वनों की रक्षा करते हैं| वनवासी मूर्ती पूजा नहीं करते बल्कि वो जंगल से मिलने वाली लकड़ी से झूलानुमा ढांचा तैयार करके उसी की पूजा करते हैं| वनवासीयों की मौसमी जिंदगी वन उपज पर ही आधरित है| आदिवासी भाई वनों के बिना अधुरे हैं| समिति का कार्य वनों की रक्षा करना है| समिति अधिकारीयों के साथ बैठकर उनसे बातचीत करके नियम बनाती हैं| जनसँख्या बढ़ने के कारण वन के पेड़ो की कटाई करनी पड़ती है, पेड़ काटने से बचने क लिए बंजर जमीनों पर लोगों को बसाया जा रहा है| आदिवासी भाई महुआ से प्राप्त होने वाले रस को देवी देवताओं को चढ़ाकर त्यौहार मनाते हैं| बरसात कम होने की स्तिथि में शीतला माता कि पूजा करते हैं| बुढ़ा देव को वनवासी पूजते हैं| वनवासी प्राकृति की पूजा करते हैं| मेहमान आने पर वो उसको महुआ का रस पिने के लिये देते हैं| वन कानूनों के बारें में लोगो को जानकारी हो इसके लिए जागरूकता अभियान चलाए जा रहे हैं| बाहरी ठेकेदारों पर कारवाई की जा रही हैं| वनवासी महुआ का फल, रस और अन्य वन्य उपज बेचकर अपना गुजारा करते हैं| वृक्षरोपण कार्यकर्मो को बढ़ाया जा रहा हैं|(RM)

Posted on: Feb 11, 2021. Tags: CG KANKER VANANCHAL SWARA VYAS SAHU

वनांचल स्वर: चाहचढ़ नाम पड़ने का इतिहास...

ग्राम-चाहचढ़, तहसील-भानुप्रतापुर, जिला-कांकेर (छतीसगढ़), से सन्तु सलाम बताते हैं, हमारे पूर्वजों ने कई बार चाहचढ़ नाम के पीछे की कहानी हमें बताई है जो काफ़ी दिलचस्प है| यहाँ पर एक झरना है जिसका नाम चाह्चिहुढ़ और उस झरने के आस पास चाहची नाम का पक्षी रहता था जिससे यहाँ का नाम चाहचढ़ पड़ा| बड़े बुजुर्ग बतातें हैं कि वन में फल, फूल और जानवर खूब थे| औषधियाँ भी मिलती थी जिनसे मलेरिया और कई बीमारियाँ ठीक होती है| लेकिन अब यह सब बहुत तेज़ी से खत्म हो रहा है खनन की वजह से| सम्पर्क@7647070617. (185513) GT

Posted on: Feb 10, 2021. Tags: CG KANKER SANTU SALAM VANANCHAL SWARA

वनांचल स्वर: घटते जंगलों के कारण जानवर भू घट रहे हैं और प्रदुषण भी बढ़ा है ...

ग्राम-चाहचढ़, तहसील-भानुप्रतापुर, जिला-कांकेर (छतीसगढ़), से लखराम सलाम 1960-1965 की बात बतातें हैं उस समय जंगल बड़े हुआ करते थे| जंगले में बाघ, हिरण, सांभर, वनभैंसा, मयूर, बरहा(जंगली सुवर), खरगोश, गिलहरी और गैंडा हुआ करते थे| पेड़ों की बाते करें तो बांस के पेड़ थे| मैं उस समय 5 साल का था| जब 20-25 वर्ष का हुआ तो चीता, बरहा, खरगोश और पक्षी समय के साथ गायब होने लगे| हम लोग शिकार पर भी जाते थे| जानवरों के गायब होने का मुख्य कारण खनन है| खुदाई होते हुए 7-8 साल हो गया है, वहां से कई तरह क जहरीले पदार्थ निकलते हैं और रही बात फायदे की तो वह बाहरियों का ही हो रहा| (185556) GT

Posted on: Feb 10, 2021. Tags: CG KANKER LACHHURAM SALAM VANANCHAL SWARA

वनांचल स्वर: खनन से प्रदूषित होते जंगल...

ग्राम-चाहचढ़, तहसील-भानुप्रतापुर, जिला-कांकेर (छतीसगढ़), से लच्छूराम सलाम बताते हैं, चाहचढ़ की भूमि पर खनन होता है| वनभूमि ग्राम कि है जो कई ग्रामों के अंतर्गत आती है| खनन की वजह से लाल पानी निकलता है जो जहरीला है| लाल पानी की वजह से खेती पर भी असर हो रहा है, लोगों के स्वस्थ्य पर नकारात्मक प्रभाव पड़ रहा है| पानी में लोहेकी मात्र ज्यादा है| इन खदानों में गाँव के 18 मजदूर भी काम करते हैं| खदान के मालिक कहते हैं कि खादानों से ग्रामवासियों का भी फायदा है, और यह झूठ है| ड्राईवर, मजदूर और अन्य कर्मचारी सभी बाहर के हैं| यह खनन का कार्य 2013 से शुरू हुआ और बनने में 2 साल का समय लगा| खनन कार्य 72 एकड़ में फैला हुआ है| खनन की वजह से आस पास की जगह पर हमेशा धुल उड़ती है| जिसके कारण ग्रामवासियों का स्वस्थ्य ख़राब होता है| खनन कार्य को रोकने के लिए हम लोग हर साल 15 दिनों के लिए आन्दोलन भी करते हैं, लेकिन इस साल महामारी कि वजह से आन्दोलन नहीं किया जा सका| खदान मालिकों ने लोगो को खूब बहलाया फुसलाया और लालच भी दिया, जरूरत का सामान भी दिया था|(185553) GT

Posted on: Feb 10, 2021. Tags: CG KANKER LACHHURAM SALAM VANANCHAL SWARA

वनांचल स्वर: जंगली पेड़ों के लाभ...

ग्राम-चाहचड़, तहसील भानुप्रतापपुर, जिला-कांकेर (छत्तीसगढ़) से संतराम सलाम बताते हैं कुसुम के बीज से जो तेल मिलता है, उसे लगाने से खुजली खत्म होती है। महुआ का पेड़ भी बहुत महत्त्व रखता है, इसको देवी देवताओं में भी चढ़ाया जाता है और खाया भी जाता। फल टोरी बीनते हैं। तेल खाने, लगाने में उपयोग किया जाता है। क्योटी का तेल घी के बराबर स्वाद देता है। भेलवा का तेल कांटा या खूंटा चुभने पर लगाया जाता है| दवाई के रूप में, यह जहरीला भी होता है। इसको गर्म करके लगाया जाता है। अंगुड का तेल एक ही बेल में कई सारे लगते हैं, इसके बीज का तेल दर्द और घाव पर लगातें हैं। भोईनीम सबसे ज्यादा कड़वा होता है, और ज्यादा असरदार भी है। इसका उपयोग लोग अभी भी करते हैं। ये पेड़ अभी भी हैं।
संपर्क@7647070617. (185781) GT

Posted on: Feb 09, 2021. Tags: CG KANKER SANTRAM SALAM VANANCHAL SWARA

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