गणतंत्र कहीं शोकतंत्र न बन जाए....गणतंत्र दिवस पर कविता
कानपुर, उत्तरप्रदेश से के एम भाई गणतंत्र दिवस के अवसर पर एक कविता प्रस्तुत कर रहे हैं:
गणतंत्र कहीं शोकतंत्र न बन जाए-
उठो ऐ नवजवानों ! वतन की आबरू की खातिर-
एक लम्हा तुम भी निकालो-
मातम छाने से पहले इस डूबते सूरज को बचा लो-
तिनका ही सही एक अंश तुम भी तो डालो-
रात गहरी ना हो जाए, एक क्षण के लिए ही-
उम्मीद का सबेरा बचा लो-
उठो ऐ नवजवानों ! वतन की आबरू की खातिर-
एक लम्हा तुम भी निकालो....
