गुरुजी कहते है लोकतंत्र है...पर हमरे गाँव में तो साहब का तंत्र है
(यह कविता पेम गाँव, चौबेपुर, कानपुर नगर में एक चट्टा-मालिक द्वारा अपने नौकरों के साथ किये गए अत्याचार पर आधारित है |)
मेरा भारत महान
मेरे गाँव की एक घटना
गाँव में एक बड़े साहब है
बड़े रसूखदार है सीएम् से भी ज्यादा उनके ठाठ है
साहब के पास भैसों के चट्टे है
साहब के पास ईटो के भट्टे है
देखभाल के लिए साहब नौकर भी खूब रखते है
एक रात की बात है
भैसों के बाड़े से चार भैसों के गुम होने की बात उड़ी
साहब के होसे-हवास ले उड़ी
साहब के कोई बात समझ में न आयी
न पुलिस में रपट लिखवाई और न कोई सुनवाई
बस घर के नौकरों की ही कर दी खूब पिटाई
भैस न मिली तो नौकरों के हाथ में ही लगा दी हथकड़ी
इतने से भी साहब का मन न भरा तो
सारी रात नौकरों को उल्टा लटकाकर किया अधमरा
प्रशासनिक व्यवस्था की बहाली का भी हाल देखिये
पुलिस ने भी न करी कोई सुनवाई और
डाक्टरों ने भी न की अपनी कार्यवाही
अब दलित नौकरों की करे कौन सुनवाई
गुरु जी कहते है हमरे देश में तो लोकतंत्र है
पर हमरे गाँव में तो साहब का तंत्र है
फिर भी मेरे भारत महान........................
फिर भी मेरा भारत महान .......................
