A child from a displaced labourers family remembers Gandhi
On Gandhi’s 63rd death anniversary, people appear to have forgotten him. But Jitendra Kumar, son of a migrant laborer remembers him with his poem:
गाँधी तू कहाँ गया था,
तेरा देश बट गया था
तेरे लोग बंट गए,
जातियां बट गईं
और अब तेरे राज्य भी बंट रहे हैं
गांधी तू कहाँ गया था
तेरा देश बंट रहा है
नदियाँ बंट गयीं
बंट गयीं फसलें
और अब तेरे जिले भी बंट रहे हैं
गांधी तू कहाँ गया था
तेरा देश मिट गया
मिट गयी सांझी विरासत
मिट गयी सांझी संस्कृति
और अब तेरे सांझे रिश्ते भी मिट रहे हैं
गांधी तू कहाँ गया
