'प्रताप' का वों शार्थी, जो गली-गली क्रांति के शब्द बुनता...कविता
कानपुर, उत्तरप्रदेश से के.एम. भाई गणेश शंकर विद्यार्थी के 136 वीं जयंती के अवसर पर उनकी स्मृति व अवदानों के सन्दर्भ में कविता प्रस्तुत कर रहे हैं :
‘प्रताप’ का वों शार्थी, जो गली-गली क्रांति के शब्द बुनता-
लहू के रंग के बीच एकता और उमीद के बीज चुनता-
निडर और निर्भीक होकर जो गुलामी के बंधन तोड़ता-
अल्फाजों की तलवार से जिसने अंग्रेजों की करी खूब खिंचाई-
उस वीर क्रन्तिकारी को याद करने की बारी है आई-
तेरे लिए देश के कोने-कोने से सलाम है भाई...
