तीजा के आगे तिहार, मोर भइया, मोला लेगे ला आबेगा... तीजा गीत
नागपुर, महाराष्ट्र से यामिनी रामपल्लीवार अपने पिता स्व. श्री जी.एस. रामपल्लीवार का लिखा हुआ छत्तीसगढ़ी भाषा में एक गीत प्रस्तुत कर रही हैं. गीत सावन में तीजा (त्यौहार) के संदर्भ में है. गीत में बहन अपने भाई से अनुरोध कर रही है कि तीजा का समय आ गया है इसलिए मुझे लेने जरूर आना :
तीजा के आगे तिहार, मोर भइया, मोला लेगे ला आबेगा-
आजै मैं आहूँ, काली मैं आहूँ, संझाकुन आहूँ बिहाने मैं आहूँ-
कहि कहि के झन देबे टार, मोर भइया, मोला लेगेला आबेगा-
गाड़ी नइ लागै, घोड़ा नइ लागै, साइकल नइ लागै, मोला मोटर नइ लागै-
रेंगे बर हवौं तैय्यार मोर भइया, मोला लेगेला आबेगा-
बच्छर हा होगे धुन दू बच्छर होगे, काली के मइया हा तइहा के होगे-
कइसन तैं डारे बिसार, मोर भइया, मोला लेगेला आबेगा-
खंती खनागे, तोर भर्री जोतागे, हरुना बोवागे अऊ माई बोवागे-
तोर अतकेच रहिस गा करार, मोर भइया, मोला लेगेला आबेगा-
झनि लेबे लुगरा, झनि लेबे पोलखा, बाटुर हवै तोला दू कोरी खरिका-
भौजी के मुख ला मैं लेहूँ निहार, मोर भइया, मोला लेगेला आबेगा-
देवर ननद मन, अब्बड़ बिजराथें, आनी बानी के तोर भांटों गोतियाथे-
तोर भइया के नइए दुलार, मोर भइया, मोला लेगेला आबेगा-
बिनहूँ मैं कांटा ला, रद्दा अऊ बारी के टरवाहूँ चिखलाला अंगना दुआरी के-
तोर पनही नहीं होही उलार, मोर भइया, मोला लेगेला आबेगा...
