अम्मा दुई-दुई पति य सुबेरे होते ना...किसान गीत
ब्रिजेश सिंह रीवा, मध्यप्रदेश से एक ग्रामीण महिला से बरसात के मौसम धान रोपण के समय गाए जाने वाले गीत रिकॉर्डिंग करवा रहे हैं:
सांझ ये अम्मा लगाया मोरे पापा सुबेरे होते ना-
अम्मा दुई-दुई पतिया सुबेरे होते ना-
देहा न मोरी पापा सोने के घड़ीलवा रे शाम डोरी ना-
अपने पापा के बगइचा सींचे हो जाबई ना-
देहू ना मोरी माया सोने के घड़ीलवा रे शाम डोरी ना-
अपने पापा के बगइचा सींचे हो जाबई ना-
सांझ ये अम्मा लगाया मोरे पापा सुबेरे होते ना...
