पानी नइये गांव में, चलें नीम की छांव में...पानी पर गीत
स्वदेश संस्था, दतिया,मध्य प्रदेश से रामजी राय पानी के संरक्षण पर एक जागरूकता गीत प्रस्तुत कर रहे हैं:
पानी नइये गांव में, चलें नीम की छांव में-
बाकी है सब लाचारी, बेडी नइये पांव में-
पानी रोको, पानी रोको, पानी रोको भाई रे-
इसी से जुड़ी है भइया सबकी समाई रे-
भले हो अकाल आज पानी का-
कल तो रहेगा राज पानी का-
पानी नइये खेत में, अब क्या होगा जेठ में-
सावन में पपीहा रोए, आंसू टपके रेत में-
पानी देगा रूखे-सूखे पेरों को तराई रे-
पानीदार आंखे कभी रोई नहीं भाई रे-
डूबे न जहाज कभी पानी का-
पानी का रहेगा राज पानी का-
पानी सूखा ताल का, रोना है हर साल का-
गोरी धनिया तपे धूप में, रंग बदल गया खाल का-
पानी से ही ठंडी आग-छाया मिलती है भाई रे-
पानी ने पेड़ों की डोली कांधों पे उठाई रे-
पानी संत पानी पीर पानी है पयम्बर-
पानी नदी पानी बहाव पानी है समंदर-
राजा धरती की राजधानी का, पानी का रहेगा राज पानी का-
बैठेंगे सब छांव में, ठंडक होगी गांव में-
पानी-पानी जुड़ते-जुड़ते नदी बहेगी गांव में-
पानी से बढेगी सारी भूमि में तराई रे-
घास-पेड़-पौधे भी बढ़ेंगे खूब भाई रे-
काट न पाएगा धार मिट्टी पानी का बरसात में-
काम और रोजी-रोटी होगी अपने ही हांथ में-
खिलेगा रूप जिंदगानी का,पानी का रहेगा राज पानी का.
