दुनिया हर परे, धुंआधार...संगी रे...वर्षा गीत
ग्राम-देवरी, जिला-सूरजपुर, छत्तीसगढ़ से कैलाश सिंह पोया जी बता रहे हैं कि उनके यहाँ बरसात हो रही है, मौसम धुंधला है इसी सन्दर्भ में एक गीत प्रस्तुत कर रहे हैं:
दुनिया हर परे, धुंआधार संगी रे – जंगल-पहाड़-पंडो, दिखे धुंआधार – रहकर संगे-संगे दिखत हैं अंधार...संगी हो – धुन्डरा में बिसत हैं अंधार...संगी रे – दिनभर गरी चरी, जंगल में चराती – दिनभर जाड़े होती, घरे बेर डूब जाती
