हम आदिवासी हैं, बड़े खुशहाली...कविता
ग्राम-देवरी, जिला-सूरजपुर(छत्तीसगढ़) से कैलाश सिहं पोया एक कविता प्रस्तुत कर रहे हैं:
हम आदिवासी हैं, बड़े खुशहाली-
जंगल-जंगल में, बहुत है फरवहाली-
हम आदिवासी है, बड़े खुशहाली-
हम तो आदिवासी भइया, बहुत खुशहाली-
जंगल-झाड़ देखे बर मिलेले हरियाली-
जंगल झाड़ देखे बर, बिछे हरियाली-
जंगले में जड़ी-बूटी, जीव के अधार-
जंगल के जड़ी-बूटी, पहुंचल संसार-
हम आदिवासी है, बड़े खुशहाली....
