कइसे गरीबी टालूं ना हो...
रुक्मिणी जी सीजीनेट जनपत्रकारिता जागरूकता यात्रा के साथ मध्य प्रदेश के मंडला जिले के केवलारी गाँव में पहुंची हैं, जहाँ कमलेश्वरी खेती -सूखा- गरीबी के संदर्भ में एक गीत प्रस्तुत कर रही हैं :
आंसू के समइया लागे सूना रे, कठिन है जीना
कइसे गरीबी टालूं ना हो ...!
कइसे गरीबी टालूं ना हो
धान और कोदो-कुटकी हार में बोवाये
धन्ये ! भगवान मोरे, पानी नी गिराए
खा करादय पूरी हार रे, कठिन हैं जीना
कइसे गरीबी टालूं ना हो......!
धरके सिधा-समान, निकल गए परदेश में
राजा किसान भैया, जोगी के भेष में
तो भी नहीं मिलइ, रोज काम रे
कठिन हैं जीना, कइसे गरीबी टालूं ना हो
कइसे गरीबी टालूं ना हो........!
