बदरा करेला गुहार हो....भोजपुरी वर्षा गीत
यह सन्देश गोकरन वर्मा का ग्राम-कामता, तहसील-नवागढ़, जिला बेमेतरा, छत्तीसगढ़ से हैं. गोकरनजी भोजपुरी में एक गीत सुना रहें है. इस गीत का संदर्भ यह है कि एक मजदूर किसान अपने सूखे खेत में बैठकर बादल को देखकर वर्षा की आस लिए तड़प में गाना गा रहा है कि कब वर्षा होगी और कब वह अपनी खेती किसानी कर सकेगा. उसे एक चिंता यह भी है कि वह जितनी भी फसल उत्पादित करेगा वह सारी फसल उसके मालिक के घर चली जाएगी और उसके बच्चे क्या खाएंगे, वह मजदूर किसान है और उसकी कोई भी सुनने वाला नहीं है...
बदरा करेला गुहार हो, तनी आवा भवनवा
देसवा पियासल हमार हो, तनी आवा भवनवा
खेत वन- बागन के सिचेल बदरा
रात-दिन देश -देश घूमेल बदरा
बरसेला कब का मोहार हो, तनी आवा भवनवा
बदरा करेला गुहार हो..........
बरसेला पानी तो लहरे फसलिया,
दाना से सेठन का भरिला अटरिया
लरिका भूखाइल हमार हो, तनी आवा भवनवा
बदरा करेला गुहार हो....................
चुसैला सेठवा कस करके खूनवा,
थाना-कचहरी मा सेठन कइ सुनवा
लुटे विदेशी सरकार हो, तनी आवा भवनवा
बदरा करेला गुहार हो...............
