नया छत्तीसगढ़ हमको बनाना है, बनाएंगे...व्यंग्य कविता
नया छत्तीसगढ़ हमको बनाना है, बनाएंगे
नया भारत हमें ही तो बनाना है, बनाएंगे
गरीबों, देशभक्तों की छत्तीसगढ़ में क्या, भारत में जगह न होगी
लुटेरों के लिए पूरा भारत फ्री होगी
उन्हीं का राज होगा, जो चोरी बेईमानी करेंगे
नया छत्तीसगढ़...
हवा में स्पंज का धुंआ होगा,
गगन कोयले के रंगो में रंगा होगा
धुएं से चाँद-सूरज की रोशनी को रोकना होगा,
धान के कटोरा को शराब का जरकिन बनाएंगे
नया छत्तीसगढ़...
न्यूनतम मजदूरी अधिनियम को
कूड़ेदानी में फेंक डालेंगे
बोनस मांगने वालों को, जेल में ठूंसवाएंगे
मजदूर नेताओं को गोलियां मरवाएंगे
नया छत्तीसगढ़...
बड़े बांधो से कोई गांववासी, निकल नहीं पाएंगे,
सभी को डुबोकर मार डालेंगे
कोई आवाज नहीं उठाएंगे
जो आवाज उठाएंगे
उसे जेल में ठूंसवाएंगे
नया छत्तीसगढ़...
हरापन जंगलो का खत्म कर डालेंगे
जो वनवासी हैं उसे नक्सली कह मार डालेंगे,
टाटा-एसआर को लाकर खनिजों को लुटा डालेंगे
नया छत्तीसगढ़...
यहाँ जाति-धर्मों का, निस दिन दंगा होगा
सभी मजदूर भूखा होगा, सभी किसान नंगा होगा
नशाखोरी में मजदूर किसानों को डुबाएंगे
नया छत्तीसगढ़...
हमारी बोलियाँ, इस देश की भाषा कहलाएंगी
सलवा जुडूम चलाके, आदिवासियों को मार डालेंगे
ये सपने हैं, हमारी वर्तमान व्यवस्था की
इसको बनाकर सच दिखाएँगे
नया छत्तीसगढ़…
