हिन्द देश के निवासी सभी जन एक हैं, रंग-रूप, वेष-भूषा सब चाहे अनेक हैं... देशभक्ति गीत
अंकित पडवार, ग्राम-सिझौरा, ब्लाक बिछिया, जिला-मंडला, मध्यप्रदेश से एक देशभक्ति गीत गा रहे हैं इस गीत में देश की महानता को दर्शाया गया है कि एक ही देश में रहने वाले लोगों की कैसे वेष-भूषा अलग-अलग है लेकिन सबमें समानता है:
हिन्द देश के निवासी सभी जन एक हैं-
रंग-रूप, वेष-भूषा सब चाहे अनेक
बेला, गुलाब, जूही,चंपा, चमेली-
प्यारे-प्यारे फूल गूंथे माला में एक हैं-
हिन्द देश के निवासी सभी जन एक हैं-
रंग-रूप,वेष-भूषा सब चाहे अनेक है-
कोयल की कूक प्यारी, पपीहे की टेर की न्यारी-
गा रही तराना बुलबुल,राग मगर एक हैं-
हिन्द देश के निवासी सभी जन एक हैं-
रंग-रूप,वेष-भूषा सब चाहे अनेक हैं – गंगा, जमुना, ब्रम्हपुत्र, क्रष्णा, कावेरी-
जाकर मिल गयी सागर हुयी सब एक हैं-
हिन्द देश के निवासी सभी जन एक हैं-
रंग-रूप, वेष-भूषा सब चाहे अनेक हैं...
