जब तक रोटी के प्रश्नों पर, लगा रहेगा भारी पत्थर...मज़दूर संघर्ष गीत
उत्तरा पडवार ग्राम सिझोरा, तहसील बिछिया, जिला मंडला मध्यप्रदेश से मजदूरों के जीवन और उनके संघर्ष पर एक गीत सुना रही हैं :
जब तक रोटी के प्रश्नों पर, लगा रहेगा भारी पत्थर
कोई ना ख्वाब सजाना तुम
मेरी गली में ख़ुशी ढूँढ़ने, अगर कभी जो आना तुम
सूरज की रोशनी को, महलों ने है चुराया
चन्दा की चाँदनी को, ओहदों ने है लुकाया
जले महलों के तीखे, जब तक अंधियारा है नीचे
कोई ना ख्वाब सजाना तुम
मेरी गली में ख़ुशी ढूँढ़ने, अगर ...
है उदास जिन्दगी तो, रोना नहीं सहारा
किस्मत के आसरे पे, होता नहीं गुजारा
उजले महलों के पीछे, जब तक अंधियारा है नीचे
कोई ना ख्वाब सजाना तुम ,
मेरी गली में ख़ुशी ढूँढ़ने, अगर ........
आंसू और पसीना ही, बन गया है जीना
तेरे लहू का खून भी, दहका रहा है सीना
जब तक रोटी के प्रश्नों पर, लगा रहेगा भारी पत्थर
कोई ना ख्वाब सजाना तुम
मेरी गली में ख़ुशी ढूँढ़ने, अगर कभी जो आना तुम...
